वंध्या की सील जीजा और मकान मालिक ने मिलकर तोड़ी

और सुरेंद्र जीजा और मैं अंदर चले गए अंदर जाते ही वह मकान मालिक ने रूम बंद कर दिया अंदर से, और अपने कमरे पर ले गया जहां डबल बेड लगा हुआ था, तभी मैं देखी बहुत अच्छा बेडरूम था, मकान मालिक शिव संकर बोला कि सुरेंद्र ड्रिंक करेगा तो सुरेंद्र जीजा बोले नहीं आप कर लो, वह एक दारू का बोतल निकालें और मेरे सामने आधी ग्लास से ज्यादा भर के पी लिए, मैं डर रही थी घबरा रही थी मैं कुछ नहीं बोली, मेरे पास ग्लास लेकर आए बोले बंध्या तू भी पिएगी, आज पीले तुझे बहुत मजा आएगा मैं बोली नहीं मैं नहीं पीती ना कभी पियूंगी, तो वह तुरंत जल्दी-जल्दी दो ग्लास दारु पिए, और सीधे आकर मुझे अपनी बाहों में भर लिया,और मेरे सामने खड़े होकर मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए बहुत गर्म थे उनके होंठ मेरा दिल जोर से धड़क उठा जैसे ही मेरे चूमने लगे, उनके मुंह से हल्की हल्की दारू की महक आ रही थी, मैं बोली महक आती है आपके वाइन की तो बोले अभी बहुत मजा आएगा तुझे, और फिर उन्होंने मेरे स्कर्ट को ऊपर किया और नीचे बैठ गए, मकान मालिक शिव शंकर बोले बहुत मस्त माल है तू बंध्या तुझे कैसे छोड़ता,

तू आ गई वरना मैं तेरे घर आ ही जाता । मैं कुछ नहीं बोली तभी मेरे पेंटी के ऊपर से ही जहां मेरी चूत थी वहां चूम लिया और बोले क्या मस्त खुशबू है तेरे चूत की, बहुत गजब की आइटम है तू और पेंटी के ऊपर से ही जहां मेरी चूंत है उस फूली हुई जगह पर अपनी नाक रगड़ने लगे, मुझे गुदगुदी सी होने लगी और अजीब सी सुरसुराहट चूत में महसूस हुई। वही सामने सुरेंद्र जीजा खड़े सब देख रहे थे, मकान मालिक खड़े होकर मुझे गले से लगा लिया बोले कि बंध्या तुम्हारे होंठ बहुत रसीले हैं लगता है इन्हें चूसता रहूं और यह कहते हुए मेरे होठों को चूसने लगे। साथ में मेरा टॉप ऊपर करके मेरी नाभि में अपनी उंगली चलाने लगे, उनके छूने का तरीका कुछ इस तरह का था कि मैं थोड़ी ही देर में अलग सा महसूस करने लगी और मेरे बदन में टूटन होने लगी, पर मैं फिर भी मकान मालिक को बोली प्लीज मैं आपसे बहुत छोटी हूं, आपने कहा था तो मैं आ गई लेकिन अब मुझे जाने दीजिए, मुझे मत कुछ करिए बहुत डर लग रहा है। तो वह शिव शंकर जो जीजा के मकान मालिक हैं उन्होंने कहा कि उस दिन जब सुरेंद्र लन्ड घुसा रहा था तब तो तुम टांगे ऊपर करके बहुत उछल रही थी पर अब क्या हुआ ? मैं बोली एक बात कहूं मैं आज यह नहीं आपसे करवाना चाहती मुझे जाने दो,

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और मैंने हाथ जोड़ लिया। तब मकान मालिक बोले बंध्या एक काम कर मुझे सिर्फ पंद्रह मिनट दे दे 15 मिनट बाद तुम यहां से चली जाना ठीक है, पता नहीं क्यों मैं खुशी भी हुई, और सच बोलूं तो अंदर से मन में लगा कि लगता है अब यह नहीं चोदेंगे मुझे पर मैं खुश होकर बोली थैंक यू अंकल, मकान मालिक बोले लेकिन इन 15 मिनट में मुझे कुछ भी जो मैं करूं वो करने से रोकोगी नहीं, मैं बोली फिर क्या मतलब आप 15 मिनट के अंदर ही अंदर डाल कर सब कर लेंगे, मकान मालिक बोले कि मैं तुम्हारे अंदर नहीं डालूंगा, बाकी सब सब कुछ करूंगा, डालने के अलावा। पन्द्रह मिनट तक तुम कोई ड्रामा नहीं करोगी, मैंने सोचा थोड़ा फिर बोली ठीक है उसके बाद तो मुझे जाने दोगे, मकान मालिक बोले बिल्कुल चली जाना, मैंने कहा ठीक है तो फिर,अब मकान मालिक मेरे सामने आए और सीधे मेरी स्कर्ट को पकड़ा ऊपर उठाया फिर ना जाने क्या उनके दिमाग में आया सीधे खींच कर नीचे उतार दिया, मैं उनके सामने ऊपर टॉप में जो मेरी नाभि के नीचे तक थी, और नीचे सिर्फ पैंटी में मुझे खुद शर्म आने लगी,

इस बार मकान मालिक बिल्कुल सामने खड़े हो गए और बोले बंध्या तुम पूरी कयामत हो तुम्हारे जैसी मैंने परफेक्ट फिगर की लड़की आज तक नहीं देखी, तुम यह देखो और उन्होंने कहते हुए मेरे पैंटी के ऊपर चूत के उपर जहां फुली हुई जगह थी,वहां पर हाथ रख दिया और बोले यहां तो आग लगी हुई है तुम्हारी पैंटी भी बहुत गर्म है, और उन्होंने मेरी चूत को पेंटी के ऊपर से ही दबा दिया, बोले यह बहुत फूली है पता है फूली चूत बहुत सेक्सी और चुदासी लड़की की रहती है। मैं यह सब नहीं जानती थी,मैं खड़ी थी वह बैठकर मेरी पैंटी के ऊपर से फूली हुई जगह पर अपनी नाक रख दिए और बोले बहुत सुगंधित महक आ रही है तुम्हारी चूत से और मेरी जांघों को खड़े-खड़े ही चूमने लगे और मेरी चूत के ऊपर फूली जगह पर पेंटी के ऊपर से ही बहुत चूम रहे थे, इसके बाद टॉप को थोड़ा ऊपर करके मेरी कमर से लिपट गये और मेरी नाभि पर अपनी जीभ से चाटने लगे और नाभि को करीब 3,

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4 मिनट तक चूमते रहे उधर मेरे फूली हुई जगह को पैंटी के ऊपर से चूत को दबाते जा रहे थे, मुझे थोड़ा-थोड़ा कुछ होने लगा यह सब सुरेंद्र जीजा देख रहे थे और फिर सुरेंद्र जीजा बोले कि अंकल मुझे भी ड्रिंक करना है। मैं आपकी दारू पी सकता हूं करता? अंकल बोले हां बिल्कुल सुरेंद्र तुम ले लो सामने रखी है, सुरेंद्र जीजा गए और उन्होंने फुल ग्लास दारु भरकर पीने लगे, मैं उनको देख रही थी उनका पेंट का जिप जहां होता है वह बहुत उठा हुआ था, मैं समझ गई कि जीजा भी अब एक्साइटेड हो गए लगता है, तभी मकान मालिक नाभि चूमने के बाद मेरे टॉप के अंदर से हाथ मेरे सीने में पहुंचा दिया, उनका हाथ सीधे मेरे नंगी बूब्स दूध पर पहुंच गया जैसे हाथ से मेरे दूध को छुआ मेरे मुंह से एक सिसकी निकली तभी मकान मालिक बोले यार बंध्या तू तो फुल चुदवाने के मूड में आई है, फिर क्यों इतना नाटक करी तूने, आज तो तुमने अंदर ब्रा भी नहीं पहना ऐसा लड़की तभी करती है जब उसे चुदाई करवानी हो या दूध दबवाने हो, मैं शरमा गई कुछ नहीं बोली क्यों कि ये बात मकान मालिक सच ही बोले, अब मकान मालिक अंकल खड़े हो गए और टॉप के ऊपर से ही मेरे सीने में किस किया और मुझसे लिपट गए मेरे को गले से लगा लिया, उनका शरीर बहुत भारी भरकम था और सीधे अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिया उधर नीचे उनका लन्ड खड़ा होके तन गया था सीधे मेरी चूंत पर पेंटी के ऊपर से ही सटा कर खड़े-खड़े अपनी कमर को रगड़ रहे थे,

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