वंध्या की सील जीजा और मकान मालिक ने मिलकर तोड़ी

और बोली अगर अब अगर छोड़ोगे नहीं तो मैं मार दूंगी तुझे कमीने गन्दे जीजा, मुझे जाने दो मुझे तेरे ड्रेस नहीं चाहिए। मैं जैसे ही दरवाजा कि खिटकिली अंदर से खोलने लगी, जीजा फिर से पकड़ लिए पीछे से और मेरे हाथ से चाकू छीनकर ऊपर रैक में फेंक दिया, और मुझे फिर से जबरदस्ती उठाकर बिस्तर में पटक दिया, जीजा बोले बंध्या मान जाओ प्लीज और मेरे ऊपर इस बार चढ़ गए, मैं फिर से उनसे छुड़ाने लगी लेकिन इस बार जीजा मेरे बिल्कुल पेट के ऊपर दोनों टांगें इधर उधर करके ऐसे चढ़ गये कि मैं कुछ भी कर के नहीं उठ सकती थी न ही छुड़ा सकती थी, अब जीजा एक हाथ से मेरी फ्रॉक को ऊपर करके मेरे सीने तक कर दिया,तो पैर से लेकर सीने तक पुरी नंगी हो गई बीच में सिर्फ पैंटी बची बदन में जीजा देखकर एक दम ललचाई आंखों से देखे और बोले बंध्या क्या मस्त चिकनी माल हो मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि मैं तुम्हारे उपर चढ़ा हूंज दुनिया की सबसे सेक्सी लड़की को चोदूंगा।

ये कहते हुए जीजा मेरी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिये, पेट में बहुत टांगे इधर उधर करके बैठे थे इस वजह से उनके हांथ अपने हाथ से पकड़ नहीं सकते थी, और पैंटी के अंदर से हाथ ले जाकर मेरी चूत में हाथ रख दिए और बोले बहुत गीली हो रही है चूत तुम्हारी बंध्या और तुम बोलती हो कि मैं अभी छोटी बच्ची हूं। तुम बहुत झूठी हो बंध्या, मुंह से मना कर रही हो पर तुम्हारी चूत कुछ और बोल रही है। तुम यहां बैठे-बैठे गीली हो गई मतलब तुम्हारे मन में तन में अंदर चुदवाने का ख्याल चल रहा है। यह बात बिल्कुल जीजा ने सच बोले, मुझे जीजा के साथ रूम के अंदर आते से ही कमलेश सर की बात याद आ रही थी कि जीजा यहां लाए हैं तो आज कहीं मुझे चोद ना दें और मेरे मन में अंदर से कुछ अकुलाहट सी और अलग फीलिंग हो रही थी, और मैं अंदर ही अंदर सोच रही थी कि काश जीजा मुझे जबरदस्ती चोद दें, मैं मना भी करूं तो ना माने, पर मैं फिर भी जीजा से बोली नहीं ऐसा कुछ नहीं है,

जीजा मुझे छोड़ दो, तब जीजा बोले नहीं सेक्सी बंध्या तुम बहुत चुदासी हो और उन्होंने मेरी चूत में उंगली डाल कर उसका चिपचिपा चूत रस निकाल कर मुझे दिखाया और बोला देखो यह तुम्हारी चूत का रस है, यह लड़की जब चुदासी होती है तभी चिपचिपाहट वाला रस निकलता है। मैं अब क्या बोलूं मुझे समझ नहीं आया तभी मेरी छाती के ऊपर हुई फ्रांक को गले तक कर दिया, उसी समय मैं हाथ जीजा के पकड़ने लगी पर तब तक वह मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे दूध दबाने लगे, और मेरे मुंह में अपने होठों को रगड़ने लगे मैं चेहरा इधर-उधर झटक रही थी कि वह अपने होठों से मुझे चूम ना पायें,पर जीजा एकदम से पकड़ के मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए, उनके बहुत गर्म होंठ मेरे होंठों को चूमने लगे और उनकी गर्म सांसे मेरी नाक में समाने लगी, और उधर नीचे अपने एक हाथ को मेरी पेंटी के नीचे फिर से घुसा कर मेरी चूत में जैसे उंगली डाली मुझसे रहा नहीं गया। और मुझे बिल्कुल पता नहीं कैसे क्या होने लगा,

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मैं एक बार फिर से बोली की जीजा मुझे छोड़ दो मैं कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी, प्लीज मुझे जाने दो मत करो कुछ भी, पर जीजा कहां मानने वाले वो अपनी उंगली को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगे, मुझे अब ना जाने कैसी अजीब सी सुरसुराहट और कपकपी पूरे बदन में होने लगी, जीजा की यह हरकत मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी, वह अपनी उंगली जोर जोर से अंदर बाहर चूत में करने लगे मैं कांपने लगी। और तभी जीजा का एक हाथ जो खाली था उससे बूब्स को दबा रहे थे, मेरे दोनों बूब्स ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगे, मैं अब कुछ बोल ही नहीं पा रही थी, मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा और मैं बिल्कुल मचलने लगी, जीजा बोले क्या मस्त माल हो बंध्या तुम अभी तक कितने लन्ड ले चुकी हो? मैं बोली यह क्या बोल रहे हो जीजा, आज तक मुझे किसी ने छुआ भी नहीं है, आप भी मत करो मुझे बहुत डर लग रहा है, ना जाने मुझे क्या होने लगा है छोटी बच्ची हूं, मुझे कुछ नहीं पता। तभी जीजा जोर से मेरे होठों को चूमने लगे और बोले बंध्या तुम बहुत बड़ी वाली हो, झूठ बहुत बोलती है। मैं अभी तुम्हारे चूत में उंगली कर रहा हूं वह शट-शट अंदर बाहर जा रही है, तुम चुप ही रहो भले ही ना बताओ, मैं थोड़ी सी अकड़ कर बोली अपने मन से कुछ भी मत बोलो जीजा, आज तक मुझे किसी ने छुआ भी नहीं करना तो दूर की बात है, हालांकि मैंने यह झूठ बोला मुझे कमलेश सर पहले मर्द है जिसने मेरे बदन को छुआ और मेरे चूत को चाट चुके थे। पर उन्होंने भी मुझे चोदा नहीं था।

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तभी जीजा मेरे होठों को फिर से कस के चूम लिया अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, जीजा मेरे मुंह को खुलवाने लगे और जैसे ही मैंने अपना मुंह खोला, मेरे जीभ को अपने होठों से पकड़कर चूसने लगे और चाटने लगे। मैं अब बिल्कुल मचलने सी लगी, जाने कैसे मेरे हाथ जीजा के पीठ में चले गए और मैं हांफने लगी, तभी जीजा बोले बंध्या तुम बहुत मस्त माल हो, तुम मेरी रखैल बनना। मेरी हालत अब ये हो गई कि मैं अब कुछ नहीं करने की स्थिति में पहुंच गई थी, तभी जीजा बिस्तर से उठे और अपने कपड़े उतारने लगे, मैं उठकर बैठने लगी तो जीजा बोले, बंध्या अब नाटक की तो उठा कर पटक दूंगा, तुम्हारा मन है बहुत चुदवाने का है फिर ऐसा क्यों कर रही हो। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि आज के पहले सिर्फ कमलेश सर ने मुझे छुआ वह भी मेरे ही घर में मुझे छुआ था, तो मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी, पर जीजा ऐसा बोले तो मैं बिस्तर में ही रह गई। अब जीजा मेरी सामने अपनी शर्ट पैंट उतार के पहले अंडरवियर बनियान में आए मैं उनको देख ही रही थी, मेरे सामने अपना बनियान उतारा उनकी नंगी छाती देखी और फिर जैसे ही अपनी अंडरवियर नीचे खिसकाने लगे, कमर से नीचे करते ही जीजा का लन्ड बहुत लंबा और मोटा मेरे सामने तना हुआ खड़ा था, अपनी अंडरवियर उतार फेंकी जीजा पूरे नंगे हो गए, उनके लन्ड के पास बहुत सारे बाल थे, नंगे होकर जीजा मेरे बिस्तर पर चढ़ आए, मेरा सीना जोर जोर से धक धक करने लगा, मेरी सांसें बहुत तेज़ हो गई अब मुझे बहुत घबराहट होने लगी,

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