वंध्या की सील जीजा और मकान मालिक ने मिलकर तोड़ी

दीदी के देवर ड्रेस दिलाने के बहाने किराये के रूम में ले जाकर मुझे चोदना चाहा, देवर जैसे घुसाये मैं चीखी मेरी चीख सुन, उन्हीं के मकान मालिक आ गये और फिर दोनों ने मिलकर मेरी शील तोड़ी…
मेरा नाम बंध्या है मैं सतना जिले के रामपुर के पास एक कस्बे की रहने वाली हूं, हम तीन बहनें और एक भाई है, मुझसे बड़ी दो बहनें हैं दोनों की शादी हो चुकी है। मैं सबसे छोटी हूं, दसवीं कक्षा की छात्रा हूं, सब कहते हैं मैं बिल्कुल हिरोइन अमृता राव जैसी दिखती हूं, मैं अपनी सच्ची बात आज लिखने की बड़ी मुश्किल से हिम्मत जुटा पाई हूं। इसमें लिखी एक एक शब्द एक एक बात सच है। मैं बहुत स स्लिम लड़की हूं। मेरे साइज में मेरी कमर-26” मेरे ब्रेस्ट- 32” और हिप्स-36” के हैं। पर मेरे पापा मुंबई में जहाज में काम करते हैं हम गरीब घर से हैं ज्यादा पैसा नहीं है मेरे मम्मी पापा के पास , मेरे पापा एक साल के लिए मुंबई चली जाती है, मेरी बड़ी बहन मेरी दीदी के यहां से निमंत्रण आया कि वहां भागवत की कथा है, मुझे दीदी ने बुलवाया मम्मी से दीदी बोली कि वंध्या को भेज दो सात आठ दिन के लिए थोड़ी मेरे काम में हेल्प करायेगी। मम्मी ने भाई को बोली जा इसे दीदी के पास पहुंचा दे और मेरा भाई मुझे दीदी के यहां पहुंचा के चला आया।

दीदी के हसबैंड चार भाई हैं और दीदी के घरवाले सबसे बड़े हैं, भाईयों में तो उनसे जो तीन छोटे भाई हैं मैं उनको भी जीजा कहती हूं।जो दीदी के हसबैंड हैं उनसे दूसरे नंबर के हैं उनका नाम सुरेन्द्र शुक्ल हैं वो अक्सर मुझसे मजाक करते और मुझे घुरते रहते थे,उनकी नियत मेरे प्रति अच्छी नहीं थी । दीदी के यहां सब बोरवेल में नहाते थे और शौच के लिए बाहर जाना पड़ता था, एक दिन मैं नहाके आयी व्हाइट कलर की मैक्सी पहन कर नहाई थी, अंदर ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी थी पानी में भीगने के कारण सब दिख रहा था मैं जैसे ही आंगन में नहा कर आई सुरेंद्र जीजा सामने आ गये और उस समय अगल बगल कोई नहीं था तो मुझे बोले वंध्या जी तुम्हारा सब कुछ दिख रहा है, मेरी नियत मत खराब करो नहीं अच्छा नहीं होगा ऐसे दिखा देती हो तो फिर कंट्रोल नहीं होता है।

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मैं भी उनसे खूब मजाक कर लेती थी तो मैं बोली जीजा जी मत देखा करो जब हिम्मत नहीं है तो, और उन्हें चिढ़ाते हुए बोली मर्द वो होता है जो बोलता नहीं करके दिखा देता है।जो बादल गरजते हैं बरसते नहीं जीजा जी। तब वो बोले वंध्या तुम मेरी शाली लगती हो मतलब आधी घरवाली हो मेरा हक बनता है तुम पर फिर भी तुमने मेरी मर्दानगी पर सवाल खड़े कर दिए, अब तो तुम्हें बताऊंगा कि मैं कैसा मर्द हूं। मैं बोली क्या कर लोगे जीजा वो पास आये और बोले वंध्या मेरी सेक्सी साली पकड़ के लगता है अभी यंही आंगन में तुम्हें चोद दूं मेरा लन्ड तुम्हारी चूत में घुसेगा तो सारी गर्मी उतर जाएगी तुम्हारी वंध्या चीखने लगोगी इतना बड़ा मस्त लन्ड है मेरा, लड़कियां तरसती हैं मुझसे चुदवाने के लिए। मैं बोली कोई नहीं तरसता अपने मुंह से अपनी तारीफ मत करो जीजा, मुझे भी नहीं जानते हो कि मैं कौन हूं? मुझे बंध्या कहते हैं ऐसा कोई मर्द नहीं जो मेरी चीख निकाल दे समझे सुरेन्द्र जीजा, फ्री में सब कर लोगे क्या मुझसे, सड़क में पड़ा फ्री का माल समझ लिया क्या मुझे आपने जीजा? भला छूकर दिखाओ , सुरेन्द्र बोले वोहह वंध्या तुम शहर की हो और तुम्हें शहर का पानी लग गया शहर की लड़कियां तो सही है पैसे के बिना या कुछ लिए नहीं देती।

तब मैं बोली जानते सब हो जीजा समझदार हो, और समझदार के लिए इशारा काफी होता है। तब सुरेन्द्र जीजा बोले अब साफ साफ वंध्या अपना रेट बोलो और मुझे तुम्हें आज ही चोदना है। मैं बोली पागल हो गये क्या जीजा मैं वैसी लड़की नहीं कि पैसे में बिक जाऊं , मैं अनमोल हूं कोई खरीद नहीं सकता हां प्यार से कोई कुछ भी दे दे चलता है।तब जीजा बोले चलो फिर सतना कल जैसी ड्रेस चाहिए दिलवा दूंगा, मैं ये बात सुनकर खुश हो गई और बोली मजाक तो नहीं कर रहे हो सच नहीं हो तो मत बोलना। जीजा बोले पक्का वादा ड्रेस दिलवाऊंगा मैं बोली कल मैं अपने घर जा रही हूं आप कल की जगह परसों आओ, मैं मम्मी को बता दूंगी कि सुरेन्द्र जीजा मुझे ड्रेस दिला रहे हैं , आप आके कह देना कि मैं वंध्या को ड्रेस दिलवाने ले जा रहा हूं फिर घर पहुंचा दूंगा। सुरेन्द्र जीजा बोले अब आप के लिए कल का पूरा कार्यक्रम रद्द करना पड़ेगा , चलो ठीक है परसों तैयार रहना अपनी मनपसंद ड्रेस के लिए मैं सुबह नौ से दस के बीच आ जाऊंगा। मैं सच में खुश हो गई कि परसों मुझे मेरे पसंद की ड्रेस मिलेगी मैं दुसरे दिन अपने घर मम्मी के पास पहुंच गयी और अब सुबह का इंतजार करने लगी, सुबेरा हुआ जल्दी से तैयार हो गई, मम्मी को पहले ही बता चुकी थी कि सुरेन्द्र जीजा मुझे सतना ड्रेस दिलाने ले जाने को बोले हैं, मम्मी पूंछी तुने तो नहीं बोला मैं बोली नहीं मम्मी वो खुद ही दिला रहे हैं।

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मम्मी ने बोला ठीक है चली जाना पर उन्हें ज्यादा परेशान मत करना मैं बोली ठीक है मम्मी, मैं इंतजार कर रही थी कि तभी सुरेन्द्र जीजा जी बाइक लेकर आये ठीक नौ बजे मैं तैयार खड़ी थी मैं आसमानी कलर की फ्राकं वन पीस पहनी थी, पिंक कलर की लिपस्टिक लगाई थी, जीजा जी मुझे देखने लगे मैं बोली जल्दी चलो जीजा, मम्मी बोली कि पानी चाय तो पी लेने दे ,तब जीजा जी बोले लौट के आके सब करेंगे आंटी अभी जाने दो, मम्मी बोली ठीक है जाओ और ये वंध्या अगर ज्यादा परेशान करे तो बताना या आप ही डांट देना, जीजा बोले अरे इतनी अच्छी साली है मैं थोड़ी न डांटूगा, और हम दोनों चल दिए मैं बाइक में दोनों पैर एक तरफ करके बैठ गई तो जीजा बोले टांगों को इधर उधर करके बैठो तब मैं बोली अभी यहां से चलो फ्रांक पहनी हूं जीजा चल दिए थोड़ी देर में सतना पहुंचे तो जीजा बोले अभी साढ़े नौ बजे हैं इतनी सुबह दुकान नहीं खुलती ग्यारह बजे तक दुकान खुलेगी तब तक मेरा किराये का कमरा है कृष्ण नगर में वहीं दो घंटे थोड़ा रूकेंगे नास्ता करेंगे फिर चलके तुमको बढ़िया ड्रेस दिलवाऊंगा।

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