उपर वाली आंटी की चुदाई

हेलो फ्रेंड्स, यह मेरी पहेली स्टोरी है और बहुत मज़ेदार भी. मेरा नाम विकी है और मै नवी मुंबई का रहेने वाला हूँ.

अब आता हू मै मेन स्टोरी पे, मै जहा रहेता हू वाहा 3 फ्लोर के रूम्स है और मै ग्राउंड फ्लोर पर रहेता हू. मेरे उप्पर एक फॅमिली रहेती है जिसमे अंकल आंटी उनका एक 6 साल का बेटा और उनकी सास रहेती है. वो आंटी कड़क दिखती है. स्लिम फिगर है उनका और उनके बूब्स मस्त है बस देखते ही दबाने का मन करता है.

वो आंटी हर सनडे को पहेले फ्लोर से नीचे तक स्टैर्स की सफाई करती है और मै बाहर बैठ कर मोबाइल यूज़ करता रहेता हू तो जब वो उप्पर से सफाई करते आती है तो झुकी हुई होती है और उनके बूब्स सॉफ-सॉफ दिखाई देते है. पर मै उतना ध्यान नही देता था.

एक सनडे को फिर वैसे ही सफाई करने आई और उन्होने कोई सूट पहना था और जब वो झुकी तो बूब्स और निप्पल्स जब दिख रहे थे और उनको पता था मै सामने खड़ा हू तो भी उन्हे कुछ फ़र्क नही पड़ रहा था और मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया और फिर वो नीचे तक सफाई कर के चली गयी.

ऐसे ही 2-3 सनडे निकल गये फिर 1 सनडे को फिर आई वो और मई उनके बूब्स को देखने के लिए तरस रहा था और फिर मुझे उनके बूब्स के दर्शन हुए. और फिर जब वो नीचे आई तो मे पीछे होके खड़ा होगया और फिर जब वो आगे की तरफ सफाई कर रही थी तब ही उनकी गांड मेरे सामने थी पर कोई देख ना ले..

इस वजह से मै मोबाइल पर ध्यान दे रहा था और बिचमे देख लेता था फिर थोड़ी देर बाद वो पीछे हुई और अपनी गांड मेरे पैर से चिपका दी मेरा फिर खड़ा होगया पर मुझे लगा ग़लती से लग गया होगा पर मेरे से रहा नही जा रहा था तो मैने वापस खुद जानबूझकर अपना पैर उनके गांड के बिचमे लगा दिया और फिर सॉरी बोल के पीछे होगया और वो हसने लगी.

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मै देख के तो खुश होगया . चुदाई करने की हिम्मत मेरी सेक्स स्टोरीज पड़ के ही आई थी और उनके मुस्कुराने से मेरी हिम्मत और बड़ गयी थी. अब मै सोचने लगा कब और कैसे उनको चोदु. उनकी सास दिनभर घर पर ही रहेती थी.

पर वो दिन मे बहुत बार बाहर जाती थी घूमने. पर मै जॉब करता हू तो मुझे बस सनडे को ही टाइम मिलता था. और मै तो बस उनको चोदने का प्लान बनाता रहेता था.

मै रात को 11-12 बजे तक बाहर बैठा रहेता था ऑफीस के काम से और टाइमपास करने के लिए भी और वो रोज़ 8-8:30 के बीच आती थी जॉब से और मै उनको देख के स्माइल करता था और वो भी करती थी.

फिर एक सनडे को मेरे घर पर कोई नही था सब बाहर गये थे और जब बाहर देखा तो उनके पति की बाइक भी नही थी मै सोचा अकेले होगी और यही सोच के उप्पर चला गया देखने और देखा तो अकेले थी वोभी और घर मे कोई नही था मै चुपके से देखरहा था वो किचन मे काम कर रही थी और मै उनकी गांड को देख रहा था और सोच रहा था बस जा के गांड मार दू उनकी.

फिर मै सीधा अंदर चला गया और थोड़ा आवाज़ की वो पहेले डर गयी फिर मुझे देख के बोली अरे तुम, क्या हुआ, कुछ काम था क्या, मै बोला हाँ चाइ बनानी है पर शुगर ख़तम हो गयी है घर मै. और मै डर भी बहुत रहा था की अगर मैने स्टार्ट किया और उनका ऐसा कुछ प्लान ना हुआ तो सबको बता देंगी.

फिर वो बोली की रुक मै ही बना देती हू. मै तो यही सोच रहा था पर नाटक करने लगा और बोला नही नही आंटी मै खुद बना लुगा आप मुझे दे दो शुगर. तो आंटी बोली अरे कोई बात नही मै बनाती हू मै भी पी लूँगी.

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मै बहुत डर रहा था और सोचरहा था शुरूवात कैसे करू. और फिर आंटी ने पी ली चाइ और किचन मे गयी मै भी बिना सोचे जल्दी से पीछे गया उनके, बिना आवाज़ किए. और वो कप धो रही थी तो मै भी पीछे से जाके अपना लॅंड उनके गांड से चिपका के खड़ा होगया और बोला ये लो आंटी मेरा भी होगया, मेरा लॅंड उनकी गांड से चिपकते ही खड़ा होगया था पर मै अलग नही होरहा था, देखना चाहता था आंटी क्या बोलती है.

वो कुछ नही बोलरही थी और वैसे ही खड़ी थी मै सोचा आंटी खुद चुदवाना चाहती है या उनको लगा मैने ग़लती से किया होगा, फिर मै कप रखने के बहाने थोड़ा और आगे हुआ और पूरा लॅंड उनके गांड के बिचमे आगया था.

आंटी बोली क्या कर रहे हो मै बोला कप रख रहा हू और फिर पीछे घूमी और जल्दी से बाहर की तरफ जाने लगी मै तो बहुत डर गया के कहा जा रही है पर वो कही नही गयी और जा कर उन्होने परदा नीचे गिरा दिया.

ये देख के मै बहुत खुश हुआ और सोचा आख़िर आज मौका मिल ही गया और आंटी ने डोर भी बंद कर दिया और हसने लगी. मै भी स्माइल किया और जाके बेड पे बैठ गया और वो भी आ कर बैठ गयी और टीवी ऑन कर दी. मै सोचरहा था की वोही शुरूवात करेगी पर ऐसा कुछ नही हुआ. वो बस बैठी रही और टीवी देखने लगी.

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