ट्रेन मे मिली एक लड़की की चूत

हेलो दोस्तो, केसे हो आप सब! मेरा नाम अमित है और मेरी उमर 23 साल है और मुझे हिन्दी सेक्स स्टोरीस लिखना पसंद है, मेरे लंड का साइज़ 9 इंच है जो की किसी भी चूत को शांत करने के लिए बहोत होता है.

दोस्तो, आज मैं आपको अपनी एक कहानी सुनने जा रा हूँ जो की बहोत ही मस्त है. और मेरी ये कहानी पड़ कर आप सब का पानी एक ही झटके मे निकल जाएगा. और सबके लंड और चूत बहोत बुरी तरह से तड़पेंगे.
तो दोस्तो, आपको भी मज़ा दिलाते हुए मैं अपनी कहानी पर ले चलता हूँ. तो चलिए कहानी शुरू करते है.
ये बात तब की है जब मैं अपनी चाची के घर से वापिस अपने कॉलेज नागपुर जा रा था. उस समये बहोत सर्दिया थी तो मेरा प्लान भी अचानक ही ब्ना था. इसलिए मैं ट्रेन मे रिज़र्वेशन न्ही करवा पाया था.

तब मैने सोचा की मेरे पास तो कोई समान भी नही है तो क्यो ना जनरल डब्बे मे ही चला जाए. ये सोच कर मैने टिकेट ले ली और जनरल डब्बे मे जेसे तेसे चॅड गया. वेसए आप सब तो जानते ही होगे की जनरल डब्बे मे कितनी भीड़ होती है.

मैं जेसे तेसे उस भीड़ मे चॅड गया. और जेसे ही चड्डा तो ट्रेन चल पड़ी. फिर मैने जेसे तेसे अपने लिए जगह बनाई और एक सीट पर जा कर बेत गया. वाहा पर बेत कर मैने लंबी सांस ली और खुद को रिलॅक्स किया.
फिर मैने देखा की मेरे राइट तरफ एक शादी शुदा 23 साल की लड़की बैठी थी. जो की काफ़ी ग़रीब परिवार से लग रही थी. क्योकि उसके कपड़े ही बता रहे थे की बहोत ग़रीब परिवार से है.

मेरे दूसरी तरफ एक 50 साल का बुड्दा बैठआ था. मैं चुप चाप वही बैठ गया. लड़की विंडो वाली सीट पर बैठी थी और विंडो भी ओपन थी. तो मैने उससे कहा की ठंड लग रही है तो विंडो बंद करदो.

उसने मेरी बात मान ली और विंडो बंद करदी. फिर ट्रेन के चलने से उसकी झांगे मेरी झंगो से टच हो रही थी जो की मुझे काफ़ी अछा लग रा था. और यही एहसास मुझे पागल कर रा था.
फिर ऐसे ही ये एहसास होते-होते मेरी आँख कब लग गई मुझे पता ही नही चला. वो भी खिड़की की तरफ सिर रख कर सो रही थी और मैं भी उसके कंधे पर सिर रख कर सो रा था.

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तभी मुझे एहसास हुआ की मैने सिर उसके कंधे पर रख रखा है तो मैने हटा लिया और सीधा हो कर बैठ गया. पर मुझे नींद आ रही थी जिसकी वजह से मेरा हाथ उसकी झांग पर था और फिर से मेरा सिर उसके कंधे पर जा पहुचा था.

और फिर जब मुझे दुबारा लगा तो मैने फिर से सिर को हटा लिया. पर मेरे ऐसे बार बार होने से वो परेशन हो रही थी शायद उसकी नींद भी खराब हो रही थी. इसलिए वो बोली की कोई बात नही आप रख लो.
अब मैं उसकी ये बात सुन कर कंधे पर सिर रख कर सो गया और उधर मेरा हाथ उसके दूसरे कंधे पर जा टीका और एक हाथ उसकी झांग पर था. और फिर जब थोड़ी देर बाद मेरी आँख खुली तो मैं ये पोज़िशन देख कर हैरान हो गया.

पर मुझे ये भी रियलाइज़ हुआ की वो भी मुझे कुछ नही कह रही थी. इसलिए मैने अब अचानक से हाथ उसके ब्लाउस पर से उसके बूब्स पर रख दिया. जिससे उसे ये ना लगे की मैने ये जान बूज कर किया है. फिर उसने फिर से कुछ नही कहा तो मैने उससे शॉल को अच्छे से औड़ने को कहा तो उसने ऑड ली.

तभी थोड़ी देर बाद उसका हाथ मैने अपनी पैंट पर महसूस किया जो की मेरे लंड को सहला रही थी. फिर मैं समज गया की अब कोई ना नही है, लाइन पटरी पर है इसलिए चल ही लेते है.
फिर मैने ऐसे ही कंबल निकाला और उससे लिपट कर बैठ गया. सारे पॅसेंजर सो रहे थे की ट्रेन किसी स्टॉप पर रुकी और काफ़ी लोग उतार गये. पर अभी भी मेरे सामने 4 लोग बैठे थे और वो बुड्दा भी बैठा था. जिन्होने आगे को उतरना था.

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और फिर ट्रेन चलने पर वो सब सो गये तो मैने उस लड़की का नाम पूछा तो उसने अपना नाम सुमन बताया और कहा की उसके पति ऑटो चलाते है. और उन्होने मुझे कभी खुश नही रखा है. क्योकि वो डेली रात को शराब पी कर आते है और सो जाते है. और मैं भी अपनी सास से टंग आ कर मयके जा रही हूँ.
उसकी ये बात सुन कर मैं समज गया की वो सेक्स चाहती है. इसलिए मैने उसके पेटिकोट मे हाथ डाल दिया तो वो आहह करने लग गई. और फिर उसकी चूत को छुआ तो उसकी चूत एक दम गीली और पानी मे भारी हुई थी जो की मैने चाट लिया.
अगला स्टॉप भी आ गया और सब वाहा पर उतार गये एर सारी सीट खाली हो गई तो मैने उससे लिटा दिया. वाहा पर लिटा कर उसकी चूत को जीब से चाटने लग गया और अपना लंड चुसवाने लग गया.

चूत ने 10 मिनिट बाद ही अपना पानी निकल दिया जिसे मैं पी गया और फिर मेरे लंड ने भी बरसात करदी जिसे उसने पी लिया. अब मैं उससे वॉशरूम मे ले गया और उसकी एक टॅंग उपर उठा कर उसके चूत मे लंड डाल दिया जिससे उससे बहोत दर्द हुआ. पर मैने उसके होंठ अपने होंठो मे भर लिए और चोदने लग गया. और फिर करीब 20 मिनिट बाद हमारा निकल गया और हम कपड़े पेहेन कर बाहर आ कर वही पर बैठ गये.
अब मैं उसकी गोद्द मे सिर रख कर सो गया. और मेरी आँख सुबह चाय वाले की आवाज़ से खुली तो पाया की वो लड़की वाहा पर नही थी. तब मैं रात के बिताए पल को याद कर के मुस्कुराने लग गया.

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