सामने वाली भाभी ने लंड हिलाया

सामने वाली भाभी ने लंड हिलाया

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम शेखर हैं, मेरा बैंगलोर मैं इंजीनियरिंग मे एडमिशन हुआ था, तो बैंगलोर मे एक पेइंग गेस्ट बनकर मैं रहनेलगा सारा बंदोबस्त घर वालो ने कर दिया था, तो मैं बैंगलोर पंहुचा और अपने रहने वाली जगह देख कर बहुत खुश हुआ एकसोसाइटी मे मेरा पेइंग रूम था, रूम अच्छा बड़ा था रूम मे एक सोफे था और सोने के लिए अच्छा सा बिस्तर, पढाई करने केलिए चेयर टेबल थी और एक आलमारी जिसमे मैं अपने कपडे और दूसरा सामान रख सकता था, रूम से ही लग कर एक गैलरीथी जहाँ से मुझे सामने वाला फ्लैट नज़र आता था, और सामने एक गार्डन भी था जहाँ बहुत हरियाली थी, तो पढ़ने मे भी दिल लगारहता था, खाने के लिए मुझे निचे मकान मालिक के यहाँ जाना पड़ता था, तो कुल मिलकर मेरे रहने और खाने का अच्छा बंदोबस्तहो गया था |

मेरा मन भी वहां जल्दी लग गया था और मेरे मकान मालिक भी अच्छे थे, अंकल का खुद का बिज़नस था और आंटी हाउस वाइफथी, उनके दो बेटे और एक बेटी थी, तीनो की शादी हो चुकी थी बेटे काम के सील सिले मे दूसरे शहर मे रहते थे और बेटी अपनीससुराल मैं |

मुझे वहां लग भग तीन – चार महीने हो चुके थे और मुझे वहां रहने और पढ़ने मे बड़ा मजा आने लगा था मेरे कॉलेज मे बहुत सारेदोस्त भी बन गए थे लेकिन सोसाइटी मे ज्यादा दोस्त नहीं थे क्योंकि मैं अक्सर घर आकर पढाई करने लगता था |

जब मैं पढाई करते करते बोर हो जाता था तो गैलरी मे आकर कुछ देर खड़ा रहता था और कभी कभी सिगरेट भी पि लिया करताथा |

एक दिन शाम को कॉलेज से आने के बाद मैं गैलरी मैं खड़ा था और सिगरेट पि रहा था तभी मेरी नज़र सामने वाले फ्लैट मे पड़ी, वहां पर एक भाभी रहती थी (मेरी उनसे एक – बार बात हुई जब वह माकन मालिक के घर आयी थी उन्होंने ही मुझे उनसेमिलाया था जब मैं निचे कहना खा रहा था ) भाभी अक्सर घर पर अकेली ही रहती थी क्योंकि उनके हस्बैंड नॉकरी के सिलसिलेज्यादा तार बहार रहते थे कभी कभी महीने मे दो – तीन दिनों के लिये घर आजया करते थे |

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उनके कोई बच्चे नहीं थे और कुछ दिनों बाद पता चला की उनके हस्बैंड का मार्केटिंग का जॉब हैं, खैर मैं एक दिन बहार गैलरी मैंखड़े होकर सिगरेट पि रहा था तभी मैंने देखा सामने वाली भाभी मुझे देख रही थी, मैंने हाथो से उन्हें नमस्ते किया और फिर इधरउधर देखने लगा, थोड़ी देर बाद फिर मेरा ध्यान उनकी तरफ गया, तो मैंने देखा वह मुझे ही देख रही थी, मैंने इस बार उन्हें एकस्माइल दी, बदले मे उन्होंने भी मुझे स्माइल दिया, मे फिर यहाँ वहां देख रहा था मेरी सिगरेट भी ख़तम हो गयी थी इस बार फिरमेरी नज़र उन पर पड़ी तो मैंने देख वह अभी भी मुझे ही देख रही थी, मुझे इस बार लगा पता नहीं इनको क्या हो गया हैं और फिरमैं अंदर आगया |

अगले दिन फिर से शाम को उसी वक़्त जब मैं गैलरी मैं खड़ा होकर सिगरेट पि रहा था तो फिरसे वही भाभी मुझे दिखी और वहमुझे ही देख रही थी, मैंने फिर से उन्हें नमस्ते किया और इस बार मैंने भी उनसे हाथो से इशारा करके पूछा क्या हुआ, उन्होंने हाथहिलाकर मुझे आने को कहा, मैंने इशारो से उन्हें कहा मैं आता हूँ पांच मिनट मैं, और वह स्माइल देकर अंदर चली गयी |

मुझे लगा शायद उन्हें कोई काम होगा क्यंकि उनके हस्बैंड भी घर पर नहीं रहते थे तो घर का कोई काम करवाना होगा, खैर मैंनेजूते पहने और उनके घर की तरफ चल दिया, मैंने डोर बेल बजाई भाभी ने दरवाज़ा खोला, उन्होंने मेरे लिए शायद पहले से चायबनाकर रखी थी, क्यंकि मैं जैसे ही वहां पंहुचा भाभी ने पहले ही मेरे लिए चाय और पानी ला दिया |

मैं शायद ऐसे पहली बार भाभी से अकेले मैं बात कर रहा था, भाभी मुझसे पूछ रही थी कहा से हो, कौनसी ब्रांच हैं मेरी इत्यादिइत्यादि, मैंने पूछा भाभी आपने मुझे क्यों बुलाया, उन्होंने कहा देखो फैन की वायर निकल गयी हैं क्या तुम ऊपर चढ़ कर लगादोगे, मैंने उनसे कहा हाँ हाँ क्यों नहीं, चाय पिने के बाद भाभी ने मेरे लिए एक स्टूल लाया जी पर खड़ा हो कर मैं फैन को ठीककरने लगा भाभी ने निचे से स्टूल पकड़ रखा था ताकि मैं गिर न जाऊ |

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फैन की वायर निकली हुई थी मैंने भाभी को पेच कस और प्लास देने को कहा, मैंने जब निचे देखा तो ऊपर से मुझे भाभी के बड़ेबड़े बूब्स ब्लाउज के अंदर से दिख रहे थे उनके बूब्स इतने बड़े थे ऐसा लग रहा था कभी भी ब्लाउज को फाड़ कर बहारआजायेंगे | मैंने शायद पहली बार ऐसी नज़रो से उन्हें देखा था अब मैं फैन की वायर ठीक करके करते जान बुश कर निचे देखनेलगा मुझे उनके भरे भरे उभारो का आनंद लेने मैं जरा भी हिचक नहीं हो रही थी और बार बार मैं उनके बूब्स को देखने लगा |

मैं जान बुझ कर फैन की वायर को धीरे धीरे ठीक कर रहा था, इस बार जैसे ही मैंने निचे देखा भाभी ने मुझे उनके बूब्स को देखतेहुए पकड़ लिए और मुझे स्माइल देने लगी |

मैं समाज गया था भाभी सेक्स की भुकि हैं और इनके हस्बैंड बहार रहते हैं इसीलिए इन्हें सेक्स नहीं मिल प् रहा हैं, मुझे अंदड़ हीअंदर ख़ुशी होने लगी खैर मैंने वायर को ठीक कर दिया लेकिन मैंने लूज़ वायर लगाया था जान बुझ कर ताकि दो – तीन दिनों मैंवायर फिर से निकल जाए और फिर से मुझे इनके घर आने का मौका मिल जाए, मैं स्टूल से अब निचे आने लगा भाभी ने अपनाहाथ दिया मुझे निचे आने मैं मदद करने के लिए, मैंने उनका मुलायम हाथ पदक और निचे आया मैं जैसे ही निचे आया मेरे एकहाथ से उनका पल्लू निचे गिर गया और उनके बेकौसे से झांकते हुए उनके उभारो को देख कर मेरा लंड झट्ट से टाइट हो गया, मेरा मन करने लगा की मैं उन्हें अभी के अभी पकड़ लू लेकिन मैंने अपने आप को कण्ट्रोल किया भाभी ने भी शरमाते हुए अपनेसाड़ी का पल्लू ऊपर कर दिया | मैंने भाभी को सॉरी बोला और वापस अपने रूम मैं चला आया और इंतज़ार करने लगा कीजल्दी से जल्दी उनके फैन का वायर फिरसे निकल जाए और फिर से वह मुझे उसे ठीक करने के लिए बुलाये |

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