प्रीति की चुदाई खेत मे

Preeti Ki Chudai Khet Me हेलो दोस्तो कैसे हो आप! मेरा नाम लोकेश है और मेरी उमर 23 साल है और मैं दिखने मे बहोत हंडसॅम और बहोत ही ज़्यादा डॅशिंग हूँ. देसी सेक्स कहानी पहली चुदाई

मैं आहेमदाबाद मे रहता हूँ और मेरे पापा एक गाओं के स्कूल मे टीचर है और उनके टीचर होने की वजह से घर पर लड़कियो का आना जाना लगा रहता था और इसी के चलते वो मेरे साथ भी घुली मिली थी. मैने शहर मे लड़कियो को खूब चोदा था और काफ़ी औरतो की भी प्यास भुज़ाई थी.

एक बार की बात है मैने गाओं मे जाना था वाहा मुझे कुछ काम था इसलिए मैं 1 महीने के लिए वही पर रुकना था और वाहा पर पोहचने मे 3 घंटे लगते थे इसलिए मैं बस मे बैठकर उस गाओं की तरफ चल पड़ा था और रास्ते मे सोचता चला गया की आख़िर गाओं मे मैं एक महीने के लिए रुकना है और इस बीच मैं किस लड़की को चोदुन्गा क्योकि शहर मे तो हर कोई चुदवाने के लिए तैइय्यार होती थी पर यहा आकर मुझे किसी को पटाना पड़ेगा.

अब मैं ये सब सोचते हुए गाओं मे पोहचा और घर आकर जब अंदर घुसा तो मेरे घर पर एक प्रीति नाम की लड़की बैठी थी जो की पड़ोस मे ही रहती थी और वो दिखने मे बहोत मस्त थी, उसका फिगर 32-26-36 था जिसको देख कर मेरी नज़रे उसी पर टिक गई थी और फिर मैने अपनी आँखो से उसके जिस्म का मुयाना लिया तो मेरा लंड तो उसके बड़े- बड़े बूब्स, पतली कमर और बड़े- बड़े कूल्हे देख कर घायल हो गया.

मैने अंदर आकर मम्मी दादी के गले लगा और फिर उसके आगे आकर उसे हाय की तो उसने कोई जवाब नही दिया शायद उसे इसका मतलब नही पता था इसलिए मैने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो उसने मेरे हाथ मे अपना हाथ दे दिया और बड़े शर्मीली अंदाज़ से हाथ चुड़वाते हुए चली गई.

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मैं उसको देख कर ही सोच लिया था की मैं इसको ज़रूर चोदुन्गा मुझे बेशक उसके लिए क्या क्या ना करना पड़ जाए और फिर वो ऐसेही मेरे घर के चक्कर काटने लग गई थी और इसी के साथ अब मम्मी बोली – बेटा ये तेरे आने पर ही इतना घर पर आ- जा रही है. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं- ऐसा क्यो है ?

मम्मी- जब तुमने आना था तो ये खेत मे नही गई, नयी ड्रेस डाली.

मैं – अछा जी.

अब वो शाम को फिर से घर पर आ गई तो मैने उसे रोकते हुए कहा- क्या कर रही हो आज कल?

प्रीति- कुछ नही बस स्टडी कंप्लीट है घर का काम और खेत का.

मैं – खेत मे क्या लगा रखा है.

प्रीति- टमाटर और ककड़ी.

मैं- अछा जी चलो मेरे लिए ही ले आए.

प्रीति भाग कर घर से ले आई और मुझे दे दी और इतने मे मम्मी भी घर से बाहर चली गई और फिर मैने उसे अपने पास बिठाया और उसके पास बैठकर उसको देखने लग गया.

प्रीति – ऐसे क्या देख रहे हो?

मैं – तुम्हारा जिस्म.

ये सुन कर वो हस पड़ी और फिर मैने उसे प्रपोज़ कर दिया और गाओं मे इसका मतलब चुदाई ही होता है इसलिए वो भी मान गई तो मैने उसे गाल पर किस कर दी और इतने मे मम्मी आ गई और वो चली गई और फिर रात को सारी रात मैं यही सोचता रहा की आख़िर कैसे उसे चोदुन्गा.

फिर जब अगले दिन मैं मम्मी को कहा की टमाटर खाने प्रीति के खेत मे जा रहा हूँ तो मम्मी ने कहा की रूको प्रीति को भी ले जाओ और इतने मे प्रीति भी आ गई और उसने आज वाइट ड्रेस डाली थी जिसमे वो बहोत खूबसूरत लग रही थी और फिर मैं उसके साथ खेत की और चल पड़ा और वाहा पहोच कर झोपड़ी मे लेट गया और प्रीति मेरे पास आ कर बैठ गई की मैने उसका मूह नीचे किया और उसके होंठो पर किस कर डाली और किस करते- करते उसके कपड़े उतार दिए और उसके बूब्स दबाने लग गया.

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करीब 20 मिनिट तक मैं उसके एक एक करके दोनो बूब्स आछे से चूस्ता रहा अब उससे और बर्दाश नही हो रहा था उसके मूह से मस्ती से भरी हुई आह्ह आह्ह उमा अफ की आवाज़ें आ रही थी. वो अपने हाथ से मेरा सिर बड़ा कर मुझे अपने बूब्स चुस्वा रही थी बहोत ही मस्त महॉल बना हुआ था. मैं उसे तड़पा तड़पा कर चोदना चाहता था. और मैं वो ही कर रहा था.

अब मैने उसका पैजामा उतार दिया और मैने देखा की उसने आज पैंटी नही डाली थी लगता है पहले से ही चुदने की तैइय्यारी कर के आई थी. मैने झट से अपनी एक उंगली उसकी चूत पर रखी और उसकी चूत को मसलने लग गया. मैने फिर उसकी चूत के दाने को मसलना शुरू कर दिया जिसे वो और ज़्यादा तड़पने लग गई. मुझे ये सब बहोत अछा लग रहा था. मैं देर ना करते हुए अपनी वो ही उंगली उसकी चूत की गहराइयो मे उतार दी उसकी चूत अंदर से सच मे बहोत गरम थी.

मैं ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगली अंदर बाहर कर रहा था और उसके मूह से ज़ोर ज़ोर से आह्ह्ह आह्ह मरररर गईइइ आआईयईई आआईइ माआ निकालो अपनी उंगलीइ आईईईईईईईई आवाज़े निकाल रही थी. फिर उसी टाइम उसकी चूत मे एक जोरदार पिचकारी निकली और फिर वो शांत हो गई और बेहोशी की हालत मे लेटी रही.
थोड़ी देर बाद उसने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोली – चलो ठीक है अब मैं अपने घर चलती हूँ.

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