साथ काम करने वाली लड़की की चूत में उंगली डाला

मेरा नाम अजय है। कानपुर में घर है मेरा। मेरी शादी को 10 साल हो गये है। दोस्तों जब भी किसी लड़के की शादी नई नई होती है शुरू शुरू में सब गर्म रहता है। रोज रात में चुदाई हो जाती है। हसबैंड वाइफ दोनों ही खूब सेक्स में मजे लुटते है। पर जैसे जैसे शादी पुरानी होने लग जाती है वो स्पार्क खत्म हो जाता है। अब मेरे 3 बच्चे हो चुके है और मेरा सेक्स जीवन पूरी तरह से रुक गया था। मेरी बीबी अब सेक्स करती ही नही थी। उसे इसमें कोई मजा नही आता था। मैं परेशान रहता था। पर जबसे बच्चे हो गये थे मेरी बीबी सेक्स करती ही नही थी। रात में मैं जब भी उसके पास जाता था वो बिस्तर पर दुसरी तरह मुंह करके सो जाती थी। मैं प्यासा रह जाता था और चूत मारने को तड़पता रह जाता था। ये सारी बाती मैंने अपनी साथ काम करने वाली निभा को बतायी। वो मेरे साथ ही दफ्तर में सरकारी बाबू थी।
“तब तो अजय तुम कही बाहर हो अपनी सेटिंग कर लो” निभा बोली और हंसने लगी
“कहाँ सेटिंग कर लूँ। पूरे 3 महीने से चूत के दर्शन नही हुए है मुझे” मैंने कहा
धीरे धीरे मेरी सेटिंग निभा से ही हो गयी। जब आदमी को खाना नही मिलेगा तो बाहर तो खायेगा ही। जब हमारे ऑफिस में कोई नही होता तो मैं उससे साथ रोमांस शुरू कर देता। मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लग जाता। निभा भी मेरी तरह कानपुर की रहने वाली थी। *** नगर में घर था उसका। मीडियम फैमिली से थी। वो अभी कुवारी माल थी। धीरे धीरे मैं उसे लाइन देने लगा और उसे हर महीना नया कपड़ा खरीदकर दे देता। वो भी ख़ुशी ख़ुशी ले लेती। जब हम लोगो के ऑफिस की शाम को छुट्टी हो जाती मैं उसे बाहर घुमाने ले जाता और रेस्टोरेंट में खाना खिलाता। अब वो मुझसे पट गयी थी। अगले दिन कोई छुट्टी थी पर हमारे संचार विभाग में नही थी। इसलिए आज कम लोग की आये थे। बाबू वाले कमरे में सिर्फ निभा और मैं भी आये थे। मैंने उसकी कुर्सी अपने पास खींच ली और चूत को सलवार के उपर से सहलाने लगा।

“अजय!! प्लीस छोड़ो ना। कोई देख लेगा” वो बोली
“कोई नही देखेगा। आज सरकारी छुट्टी है जान। कोई नही आया है ऑफिस आज। सिर्फ मैं और तुम ही आये है” मैंने कहा और जल्दी जल्दी उसकी चूत को उपर से सहलाने लगा।
वो मेरे बगल कुर्सी पर बैठी थी। हम किस करने लगे। निभा बिलकुल देसी लड़की थी। ठीक ठाक थी। ना बहुत गोरी था ना बहुत काली। बस ये जान लीजिये की चोदने लायक सामान थी। मैंने उसे पकड़ लिया और होठो पर किस करने लगा। वो सरेंडर हो गयी। मैंने ऑफिस के कंप्यूटर पर ही ब्लू फिल्म लगा दी क्यूंकि आज कोई हमे देखने वाला नही था। देख देख पर मेरी साथी निभा और गरमा गयी।
“अजय!! क्या आज मुझे चोदोगे???” वो मेरी आख में आंख डालकर बोली
“जान इरादा तो कुछ ऐसा ही है” मैंने कहा और उसके कुर्ते के उपर से से गले की तरफ से अपना हाथ डाल दिया और उसके आमो को दबाने लगा। निभा “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…”
करने लगी। उसे भी अच्छा लग रहा था। मजा लेने लगी। मैं सहला सहला कर दबा रहा था। फिर मैंने अपना हाथ निकाल लिया और उसके कुर्ते के उपर से उसके दूध दबाने लगा। दोस्तों आपको बता दूँ की निभा बहुत सुंदर तो नही थी। पर जिस्म खूब भरा पूरा था उसका। जहाँ जहां पर उसके बदन में गोश होना चाहिए था खूब था। उसके मम्मे 36” के गोल गोल तने हुए थे। उसके पुट्ठे भी खूब मांसल थे। फिर मैंने उसे हाथ पकड़कर उसे उसकी कुर्सी से उठा दिया और अपनी गोद में बिठा लिया। मैं अब ऑफिस की कुर्सी पर बैठा हुआ था। निभा मेरी गोद में बैठ गयी। मेरे पेंट में मेरा लंड खड़ा हो गया। वो उसके उपर बैठी थी। उसे लंड चुभ रहा था। उसने कुछ नही कहा।
मैंने उसे प्यार करने लगा। उसके दुप्पटे को मैंने हटाकर किनारे रख दिया। उसके कुर्ते के उपर से उसके 2 गेंद जैसे दूध के दर्शन हो गये। नियत खराब हो गयी मेरी। निभा को मैंने अपनी तरह कर लिया और उसके गले, कान, सब जगह चुम्मा देने लगा। वो गुदगुदी हो रही थी। अच्छा लग रहा था। उसके दूध को मैं फिर से सहलाने लगा। निभा मेरी तरह झुक गयी और होठ पर होठ रखकर किस करने लगी। दोनों गरमा गर्म चुम्बन करने लगे। मुझे बहुत मजा आया था दोस्तों।

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जब मेरी बीबी नई नई आई थी खूब किस करती थी पर अब तो सब खत्म ही हो गया थाअ। मैंने निभा की पीठ पर अपना हाथ रखकर उपर नीचे सहला रहा था। दोनों किस कर रहे थे। वो गर्म हो रही थी। उसकी दूध भरी बेहद नशीली छातियों को देखकर कोई भी पागल हो जाता। मैं भी हो हो गाया था।
कुछ देर किस होने के बाद अब आगे बढ़ना था। मैंने उसके सूट में फिर से उपर से ही हाथ अंदर डाल दिया और जुदाड करके बायीं चूची को बाहर निकाल लिया। उसकी ब्रा को हटाकर मैंने चूसना शुरू कर दिया। निभा ने कुछ नही कहा। मजे से मुझे पिला रही थी। “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” की तेज आवाजे निकाल रही थी। मैं उसके मस्त मस्त आम को पी रहा था। मुंह चला चलाकर पी रहा था। मजा लुट रहा था। दोस्तों मुझे नही मालुम था की सांवली सलोनी लौडियों की चूचियां भी इतनी मस्त होती है। निभा की चूचियां बड़ी बड़ी तनी हुई थी और निपल्स के चारो ओर काले काले गोले चन्द्रमा की तरह गोल गोल थे। देखा तो मैं मर मिटा।
“ओह्ह जान!!! यू आर सो सेक्सी!!” मैंने कहा और चुसना शुरू कर दिया। मैं रुका ही नही। बस चूसता चला गया। मेरी साथी निभा तड़प रही थी। “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”की सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। कितना आनंद आया मुझे उस दिन। मैंने 10 मिनट तक उसकी बायीं चूची पी। फिर दाई चूची भी बिना सलवार को उतारे गले की साइड से बाहर निकाल ली और चूसने लगा। निभा भी तृप्त हो गयी। दबा दबाकर मैं मजे ले रहा था। वो बी दबवा रही थी। मैं चूस चूसकर उसके दोनों बूब्स को लाल कर दिया। अब निभा पूरी तरह से गर्म हो गयी थी। उसकी नजर मेरे पेंट पर पड़ी। मेरा उफान मार रहा था। उससे रस निकल रहा था। पेंट भी गीली हो गयी थी। निभा चुदासी हो गयी। उसने मेरी चेन नीचे खींची और मेरे अंडरवियर के अंदर से मेरा लंड बाहर निकाल लिया। मेरा लंड किसी सांप की तरह डरावना दिख रहा थाअ। पूरा 10” का लंड था मेरा।
अब मेरी साथ काम करने वाली निभा घुटनों के बल नीचे बैठ गयी। मेरी पेंट और अंडरवियर को उसने नीचे खिसका दिया। मैंने भी अपने पैर खोल दिए।
“ओह्ह अजय!! तुम्हारा लंड कितना मोटा है। तब तो ये मुझे बहुत मजा देगा” निभा बोली
“सच कहा जान। आज मैं भी तुमको मजा देना चाहता हूँ” मैंने कहा

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