मेरी क्लासमेट ज़ारा की चुदाई

मैं एक कंपनी मे हू पर ये तब की बात है जॉब मैं फाइनल एअर का स्टूडेंट था, हमारी क्लास मे टोटल 66 स्टूडेंट्स थे जिनमे 22 गर्ल्स थी. उन्ही मे से एक थी ज़ारा, जब हमारी रिपोर्टिंग हुई तो उसे मैने पहली बार देखा त और सोचा था की इसे तो मैं आपनी गर्लफ्रेंड बनौँगा चाहे कुच्छ भी करना पड़े.

हमारी 1स्ट्रीट एअर की क्लासस स्टार्ट हुई,मैने 1स्ट्रीट दे से ही क्लास लेना स्टार्ट कर दिया थे क्योंकि मैं कोई चान्स नही लेना चाहता थे की कोई और ज़ारा पर दूरे डाले, वो 4 दिन बाद कॉलेज आई. कुछ दिन बाद रेजिंग के डॉरॅन मेरे एक सिनिओर ने मुझसे पूछ की मुझे क्लास मे सबसे ज़्यादा पसन कोन सी लड़की है तो मैने कहा की ज़ारा, बस मैने तो इतना ही कहा था और मेरे गाल पर एक जोरदार छाँटा पड़ा, बाद मे मुझे पता चला की वो उस सीनियर की कज़िन है. अब तो मेरा इरादा और पक्का हो गया क्योंकि मुझे उसकी वजह से छाँटा भी प़ड़ चुका था.

ज़ारा से मैं क्लास मैं थोड़ी बहुत बाते कराता था, हालाँकि मैं शुरू से ही को-एड स्कूल्स मैं पड़ा हू लेकिन कभी मैने लड़कियो को भाव नही दिया क्योंकि मैं क्लास का 2न्ड टॉपर था और लड़किया खुद ही मेरे पास आती थी. यहा की बात ही कुछ और थी, कॉलेज का 1 फ्रेंडशिप दे था सभी एक दूसरे को बंद बाँध रहे थे, मैं फ्रेंडशिप बंद लेकर ज़ारा के पास गया और उसे वो आक्सेप्ट करने के लिए कहा.

उसने मुझे देखा, उस बंद को देखा और कहा “हाउ डरे उ तो प्रपोज़ मे फॉर फ्रेंडशिप” क्या हो तुम. उसने सारी क्लास के सामने मुझसे ऐसा कहा, मुझे उस वक़्त इतना बुरा लगा की क्या बताउ, मेरी इतनी बेइज़्ज़ती कभी नही हुई थी. तब तक मैं सिर्फ़ ज़ारा से दोस्ती करना चाहता था, उसे चोदूगा या और कुछ ऐसी कोई चाहत नही थी मेरी लेकिन उस दिन मैने सोच लिया की इस दिन का बदला मैं ज़रूर लंग. उसके बाद मेरे कई अच्छे दोस्त बन गये, लड़किया भी थी क्योंकि मैं हमेशा पड़ाई मे और प्रॅक्टिकल्स मे सबकी मदद कराता था.

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अब हम 2न्ड एअर मे आ गये, हमारे क्वालिटी ग्रूप बने तो उसमे ज़ारा भी थी, ई वाज़ थे मोस्ट इंटेलिजेंट स्टूडेंट ऑफ और ग्रूप, अब सबको मेरी हेल्प चाहिए होती थी, मैं सबकी हेल्प कराता था ख़ासकर प्रॅक्टिकल्स मे ज़ारा की भी कराता लेकिन उससे उस दिन के बाद कभी बात नही की थी, इस बार फ्रेंडशिप दे पर ज़ारा ने मुझे प्रपोज़ किया, लेकिन मैने उसे माना कर दिया, लेकिन मेरे क्वालिटी ग्रूप मेंबर्ज़ के कहने पर मैने बंद बँधवा लिया लेकिन बात तब भी नही की, वक़्त सारी बातो को भुला देता है, हम सभी सबकुछ भूल कर मस्ती और पड़ाई करने लगे अब ज़ारा मेरी गर्लफ्रेंड बन चुकी थी और सारा कॉलेज इस बात को जानता था. सेप. 20, 2003 मैने ज़ारा से मेरे साथ मेरे मामा की लड़की की शादी मैं चलने को कहा तो उसने हा कर दिया, बाकी फ्रेंड्स भी हमारे साथ थे, यहा एक बात बठाना चाहूँगा की हम दोनो ही हॉस्टिल मैं रहते थे,

26 सेप. को हम मेरे मामा जी के घर पर थे हम कॉलेज से 18 दिन की लीव लेकर आए थे, टीचर्स से कॉंटॅक्ट होने के कारण कोई परेसानी नही थी, शादी 29 सेप. की थी, मस्ती मैं शादी कंप्लीट हो गयी, उसके बाद मेरे सारे फ्रेंड्स आपने होमटाउन चले गये, ज़ारा ने भी कहा तो मैने उसे नही जाने दिया, उसे मैं आपने होमे टाउन के आया, मेरे सारे फॅमिली मेंबर्ज़ अभी मामा के यहा ही थे और अगले 5 दिन तक नही आने वाले थे, मैने पड़ोस की आंटी से के ली और सीधा सीधा बेड पर जाकर गिरा, ज़ारा ने हम दोनो के लिए चाय बनाई,मैने उसे सारा घर दिखाया और नहाने चला गया, ज़ारा कंप्यूटर पर सॉंग्स सुन रही थी. मैं बात लेकर बाहर आया तो देखा की ज़ारा का गोरा चेहरा एक दम लाल हो रा था और वो तेज तेज साँसे ले रही थी, जब मैने पूछा की क्या हुआ तो उसने कहा कुछ नही और तेज़ी से कपड़े लेकर बाथरूम चली गयी, मेरी समझ मे कुच्छ भी नही आया, उसने सॉंग्स बंद कर दिए थे,

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मैने सोच की मैं सॉंग्स स्टार्ट कराता हू, जैसे ही मैने विंडोस मीडीया प्लेयर ओपन किया उसमे जो फाइल ऑलरीडी स्टोर थी वो प्ले हो गयी और उसे देखते ही मेरी समझ मे सबकुछ आ गया, आक्च्युयली तट कंप्यूटर इस फॉर माई यंगर ब्रदर, उस पर ब्लू फिल्म लोड थी, फिर मैने देखा तो वो सारी क्लीपिंग्स थी जो हॉलीवुड मूवीस मैं होती तो है लेकिन जब उन्हे एशिया मे रिलीस करते है तो हटा देते है, अब मुझे मज़ा आने लगा था और जूनियर पर हँसी भी आ रही थी लेकिन वो भी तो लड़का है, वो व्ह सोचता आयी, मैं उन्हे देखता रहा एक से एक क्लिप था, अचानक मुझे ध्यान आया की बहुत देर हो गयी लेकिन ज़ारा अभी था बात लेकर नही आई, मेरा लंड तो टाइट होना ही था वो था, आक्च्युयली अब मैं सोच रहा था क्यो नही ज़ारा को चोदा जाए, घर मे हम दोनो ही थे कोई ड्ऱ नही था, वो भी एग्ज़ाइटेड थी इधर मैं भी था. मैं चुपके से बहटरूम के पास गया लेकिन वाहा कोई साउंड नही था, एक बार सोचा की ज़ारा को आवाज़ डॉन, लेकिन मैने धीरे से दरवाज़े पर हाथ रखा तो वो खुल गया यानी अंदर से लॉक नही था,

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