मेरे पहले चुदाई की कहानी

मेरा नाम अनिता है. यह एक रियल स्टोरी है. मैं 11थ क्लास मैं पढ़ती हूँ. चलो पहले मैं अपने बारे मैं कुछ बता देती हूँ. मैं 5’4 इंच, मेरे बूब्स 36डी, मेरी कमर 27, और मेरे चुत्तर 38 है. मेरा शरीर काफ़ी भरा हुआ है और गोरा रंग है. स्कूल मे और बाहर सभी लड़को का लंड मुझे देखते ही खड़ा हो जाता है.

वेल, मेरे ही स्कूल के टीचर ने ही मुझे सबसे पहले चोदा था. उसका नाम हरीश है. वो काफ़ी स्मार्ट है. लंबा कद, गोरा बदन, मोटा लंड(अब तो कह ही सकती हूँ)…वो मेरे फिज़िकल एजुकेशन के सर थे. मैं अपने स्कूल की वॉली बॉल टीम मे थी और मोस्ट्ली मेरा टाइम खेलने मे ही निकल जाता था. स्पोर्ट्स मे ज़्यादा टाइम रहने की वजह से मैं प्लेग्राउंड मे टी शर्ट ओर साइकलिंग शॉर्ट्स ही पहना करती थी.

एक दिन, प्रॅक्टीस के बाद मैं काफ़ी थक गयी थी और एक किनारे मे बैठी हुई थी, की तभी हरीश सर मेरे पास आकर बैठ गये. वो मेरे काफ़ी पास बैठे थे. उन्होने मुझसे पूछा की क्या हुआ मैं काफ़ी थकि हुई लग रही हूँ और कहते ही मेरी थाइस पर अपने हाथों से सहलाने लगे. मैं एकदम सकते मे आ गयी. पर मुझे भी बहोत अछा लगा. काफ़ी देर तक मैने उन्हे कुछ नहीं कहा. तभी मेरी एक सहेली वाहा आ गयी और सर ने मुझसे मेरे अगले पीरियड के बारे मे पूछा. मेरा अगला पीरियड लाइब्ररी का था जो मैने उन्हे बता दिया. प्रॅक्टीस के बाद मैं स्कूल यूनिफॉर्म मैं आ गयी(स्कर्ट और शर्ट).

लाइब्ररी के पीरियड मे मैं स्पेशल सेक्षन मे एक किताब ढूंड रही थी की तभी पीछे से आकर मुझे हरीश सरने पकड़ लिया और बोले क्या ढूंड रही हो. उनका लंड मेरे चुत्तर को छू रहा था और उनके हाथ मेरे मुम्मो पर थे. मैने कहाँ की यह क्या कर रहे हो सर? सर बोले की प्यार कर रहा हू तुम्हे. बोहोत दीनो से मेरा लंड तुम्हे पाने के लिए तड़प रहा था. तुम्हारे बूब्स देख कर देखो तो कैसा तन जाता है. उन्होने मेरा हाथ लेकर अपने लंड पर रख दिया. मेरी चूत गीली होने लगी थी. सरने अपना एक हाथ मेरी स्कर्ट मे अंदर डाल दिया और मेरी पैंटी के उपर से मेरी चुत सहलाने लगे. मुझे बोहत मज़ा आ रहा था. पर अचानक मुझे लगा की कोई आ गया तो? तभी सर ने झटके से अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत मे डाल दी और अंदर बाहर करने लगे. मेरे मुँह से निकला की आआआः और ज़ोर से करो. सर बोले की जल्दी से स्पोर्ट्स रूम मे आ जाओ, वहाँ कोई नहीं है. मैने अपने कपड़े ठीक किए और सर के साथ चल दी. जैसे ही हम स्पोर्ट्स रूम मैं पहुचे सर ने दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगे. उनका लंड बोहत मोटा और लंबा था. उसे देखते ही मेरी भी चूत मे कुछ होने लगा. सरने मुझे अपने पास बुलाया और मुझे नीचे झुकाकर अपना लंड मेरे मुँह मैं ज़ोर से घुसा दिया. पहले तो मुझे बोहत अजीब लगा. पर फिर मैने धीरेसे उसे चाटना और चूसना शुरू किया. सर ने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया.

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मेरे बूब्स अब बिल्कुल आज़ाद थे. और सर उन्हे मसल रहे थे. काफ़ी देर तक मैं सर के लंड को चुस्ती रही और फिर उन्होने मेरे मुँह के अंदर ही काम कर दिया. मैं वो सारा पी गयी. सर ने मुझे झटके से ज़मीन पर लिटाया और मेरे सब कपड़े उतार दिए. अब हम दोनो बिल्कुल नंगे थे. सर ने मेरे बूब्स को अपने हाथ मे लेकर मसलना शुरू किया और फिर एक एक को सक करना शुरू किया. मेरे चूत मेसे जूस बह रहा था. मैने सर से कहा की प्लीज़ अपनी उंगली से मेरी चूत को रब करो. सर ने अपनी चार उंगलियाँ मेरी चूत मे घुसा दी. आआआअह्ह्ह्ह, बोहत मज़ा आ रहा हैं. सर मेरा सारा दूध पी जाओ. सर बोले- इतने दीनो से तुम्हे चूसने और चाटने की तड़प थी मेरे अंदर. आज इतना चोदुन्गा की याद रखोगी. सर ने अपनी उंगलियों को बाहर निकाला और मेरे मुँह मैं डाल दी. और खुद मेरे चूत चाटने लगे. मैने कहा – खा जाओ हरीश मेरी चूत को, चाट इसे और बस चाटते ही रहो…

आआआआः, बोहत मज़ा आ रहा है. फिर हम दोनो 69 पोज़िशन मे आ गये. कुछ देर के बाद सर ने कहा की अब मैं अपना लंड तेरी चूत मे डालूँगा. मेरी दोनो टाँगो को उठाकर उन्होने अपने कंधों पर रखा और एक ही ज़ोरदार झटके मे अपना पूरा लंड मेरी चूत मे डाल दिया. मैं तो दर्द के मारे मर ही गयी. मेरी तो आँसू ही निकल आए थे. पर मज़ा कहीं ज़्यादा था. कुछ सेकेंड्स तक सर ने अपना लंड हिलाया तक नहीं और उसके बाद ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगे. अपना लंड अंदर बाहर करने लगे. मैं भी मज़े मे चिल्ला रही थी और ज़ोर से सर, घुस जाओ मुझ मे. मेरे बूब्स को सक कर रहे थे सर, मेरे सर. काफ़ी देर तक उन्होने मुझे चोदा.

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उफफफफ्फ़, मेरी ज़िंदगी का कितना इंपॉर्टेंट चॅप्टर मेरे सर ने मुझे पढ़ाया. उस दिन के बाद तो जब भी हमे मौका मिलता हम दोनो मिल के चुदाइ करते.

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