मेरा पहला ग्रूप सेक्स

हेलो दोस्तो मैं चुडकड़ ऱितु आपको अपनी पहली कहानी मे आप का बहोत बहोत सावगत करती हूँ. मुझे उमीद है आप को आज मेरी ये पहली कहानी पसंद आएगी. ये कहानी मेरे पहले ग्रूप सेक्स की है. तो मैं अब ज़्यादा बकवास ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आती हूँ.

बात उन दीनो की जब मैं कॉलेज मे पढ़ती थी. मैं कॉलेज के पी.जी मे ही रहती थी. इस लिए मुझे रोकने टोकने वाला कोई नही था. मैं एक नंबर की बिंदास और मस्त हुआ करती थी उस टाइम. मैं गंदी-गंदी मा बहेन की गालिया भी निकालती थी.

मुझे पूरा कॉलेज बहोत अच्छे से जानता था. मेरा वाहा पर एक बॉयफ्रेंड था उसका नाम राज था. वो भी मेरी तरह काफ़ी मस्त और बिंदास था. इसलिए मैने उससे फ्रेंडशिप कर ली. मैं जवान तो हो ही गई थी. इस लिए मुझे लंड भी चाहिए था.

जो मुझे राज ने दिया. उसके 8 इंच के लंड ने मेरी चूत की प्यास काफ़ी अच्छे से बुझा दी थी. मैं अब तक काफ़ी बार राज से चुद चुकी थी. मैने राज का लंड काफ़ी बार चूसा था. मुझे राज का लंड सच मे बहोत अच्छा लगता था. राज के पास सफ़ारी कार थी. जिसमे मैं उसके साथ घूमने और कॉलेज आती जाती थी.

राज के साथ उसके 3 और दोस्त थे. कमल, विजय और सोनू. तीनो के तीन काफ़ी मजबूत और अच्छी बॉडी के थे. राज भी काफ़ी हैंडसम और अच्छी बॉडी का मालिक था. मैं हमेशा उसकी मजबूत छाती से अपना सिर लगा कर रखती थी. कॉलेज के बाद हम सब राज की सफ़ारी मे घूमने जाते थे. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

हम सब काफ़ी मस्ती करते थे. हम सब बियर ड्रिंक चिकन सब कुछ खाते पीते थे. राज और मैं उसके 3 दोस्तो के साथ काफ़ी ज़्यादा ओपन थे. हम दोनो उनके सामने ही किस करते थे रहते थे. और राज मेरे बूब्स भी दबा देता था. और चलते चलते मेरी गांड पर थप्पड़ मार देता था.

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हम सब मे ये काफ़ी कॉमन था. राज और मैं हमेशा बीच वाली सीट मे बैठते थे. और सोनू कार ड्राइव करता था. और विजय और कमाल हमेशा ही पीछे बैठते थे. जब राज का मूड ज़्यादा खराब हो जाता था. तो वो मेरे सिर के उप्पर मेरी ही चुननी डाल देता था. और मुझे अपनी गोद मे रख देता था.

और मैं इस चक्कर मे उसका लंड चूसने लग जाती थी. मैने ऐसे काफ़ी बार राज का लंड चूसा था और अपने मूह मे उसके लंड का पानी निकाला था. सच मे ये काफ़ी कमाल का सीज़न होता था. ऐसे ही दिन निकलते रहे सब कुछ बहोट अच्छा चल रहा था.

तभी अचानक कमल का ब्रेकप हो गया. वो काफ़ी उदास रहने लग गया. और देखते ही देखते सोनू और विजय का भी ब्रेकप हो गया. वो तीनो अब बिना लड़की के रहने लग गये. ऐसे ही 1 महीना निकल गया था. और राज और मुझे भी सेक्स किए हुए 4 महीने हो गये थे. मेरी चूत अब लंड माँग रही थी. मेरी चूत मे आग लग रही थी उसे अब लंड चाहिए था. पर राज अब अपने दोस्तो के साथ बिज़ी रहता था.

मेरी चूत लंड के लिए तड़प रही थी. तभी मेरे पास राज का फोन आया और उसने मुझे कहा की मैं जल्दी से पैकिंग कर लूं. हम 4 दीनो के लिए घूमने जा रहे है उसके शिमला वाले घर पर. वाहा पर कोई भी नही रहता है. मैने जल्दी से सारी पैकिंग करी. और फिर कुछ ही देर मे राज की कार आ गई.

मैं कार मे बैठ गई. राज ने मुझे अंदर खींच लिया और मुझे अपनी गोद मे बिठा लिया. और मुझे किस करने लग गया. उसके दोनो हाथ मेरे बूब्स और मेरी गांड मसल रहे थे. तभी पीछे बैठा कमल बोला वा आज तो गुलाबी गांड वाली गुलाबी पैंटी पहेन कर आई है.

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तभी मुझे याद आया की मैं पैंटी लाना तो भूल ही गई. राज ने कहा कोई बात नही मैने वाहा तुझे पैंटी ब्रा डालने ही नही देनी. पूरे रास्ते हम बियर पीते हुए गये. और शाम को 6 बजे राज के शिमला वाले घर पर पहुच गये.

राज और मैं पूरे गरम हो चुके थे. राज मुझे अपनी गोद मे उठा कर अंदर ले गया. और अंदर आते ही उसने मेरे सारे कपड़े फाड़ दिए. और मेरे मूह मे अपना लंड थुस दिया. 8 इंच का लंड मैं अपने मूह मे ले कर चूस रही थी. राज का लंड बहोत ही कमाल का था मेरे गले मे उसके लंड का टॉप जा रहा था.

इतने मे कमल, सोनू और विजय भी अंदर आ गये. वो तीनो मुझे लंड चुसते हुए देख रहे थे. उनके हाथ मे बियर की बोतटले थी. और फिर उन तीनो का मूड भी खराब होने लग गया. मैं ये सॉफ देख सकती थी. राज ने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी चूत मारने लग गया.

मुझे ये पोज़िशन सच मे बहोत अच्छी लगती थी. क्योकि इस पोज़िशन मे मेरी चूत को मज़ा भी आता था और दर्द भी पूरा होता है. मैं अपनी आँखें बंद कर राज के लंड के मज़े ले रही थी. तभी मैने अपने आगे देखा की कमल अपना लंड बाहर निकाल कर मेरे होंठो पर लगा रहा. उसका 9 इंच का लंड देख कर मैं पागल सी हो गई.

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