मेरा बेटा एक मर्द का बच्चा

दोस्तो मैं रजनी हरयाणा से आज आप सब के लिए अपनी लाइफ की एक मस्त घटना ले कर आई हूँ. वेसे तो मेरी पूरी लाइफ सेक्स और लोडो से भरी हुई है. उपर वेली ने भी मेरी दोनो टाँगो के बीच ये दो इंच का छोटा सा छेद दे कर, मेरे नाम एक कयामत दे दी है.

मेरी चूत शुरू से ही मुझे बहुत तंग करती थी. 18 साल तक तो मैं अपनी चूत मे मूली गाजर ले कर अपना काम चला लेती थी. पर जब अपने पड़ोसी सोनू से मैं पहली बार चुदी तो उस दिन के बाद लंड मुझे इतना अछा लगा. की मैने सब मूली गाजर मोमबति सब कुछ छोड दिया.

अब मैं सिर्फ़ अपनी चूत मे लंड ही लेती थी. मेरे धीरे धीरे सोनू से और 8 लड़को से संबंध बन गये. वो सब मेरे आशिक़ थे, मुझे दिन रात वो चोदना चाहते थे. उपर से मेरी चूत भी ऐसी ही थी, जो सिर्फ़ लंड ही मांगती थी.

मेरी चूत शांत होने का नाम नही लेती थी. अगर एक दिन शांत हो भी जाती थी, तो अगली सुबह ये फिर से लंड मांगती थी.
जब मेरी शादी हुई तो, शादी से कुछ घंटे पहले मैने अपने सच्चे आशिक़ को अपनी चूत दी, उस दिन उसने पहली बार मुझे 40 मिनिट चोदा. साला कमीना गोली खा कर आया था. शादी के बाद जब मैं घर पर एक दिन बाद फेरा डालने के लिए आई.

तो मेरे 8 दोस्तो ने मुझे मेरे घर के साथ वाले घर मे उपर बुलाया. वाहा उन्होने मुझे सब ने करीब एक घंटे तक चोदा. सब ने मेरी चूत को बारी बारी से चोदा. मैं अपने चारो तरफ लंड देख कर काफ़ी खुश थी.

उस दिन के बाद मैं जब भी अपने घर आती थी, तो उन सब से चुदाई करवाती थी. पर मैं हर हफ्ते तो अपने घर आने से रही. क्योकि मेरी शादी हिसार मे हुई थी. और वाहा से मेरे घर आने मे 6 घंटे आराम से लगते थे.

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मेरे सुसराल मे मेरे सास सुसर, मेरे पति और मेरी ननद रहती थी. मेरे पति और मेरे ससुर जी सुबह ही अपनी शॉप पर चले जाते थे. उनके जाने के बाद मेरी ननद सीमा भी अपने कॉलेज मे चली जाती थी.

अब घर पर मैं और मेरी सासू मा ही रहती थी. हमारा घर बहुत बड़ा था. इसलिए हमने अपने गेट के आगे वाला रूम किराए पर दिया हुआ था. वाहा हमने कॉलेज मे स्टडी करने वाले 4 लड़को को रखा हुआ.

वो चारो लड़के एक से उपर एक थे. उन्हे देख कर मेरी चूत और गांद मे खुज़ली होने लग जाती थी. आप को अच्छे से पता है, एक औरत बाहर की ओर तभी देखती है. जब उसका पति उसे खुश ना करता हो.

ऐसा ही कुछ मेरा हाल था, मेरा पति वैसे तो अपने आप को बहुत दमदार समझता है. पर साला 3 मिनिट से ज़्यादा उससे सेक्स नही होता. वो ज़्यादा से ज़्यादा सिर्फ़ 4 मिनिट ही सेक्स कर पाता है.

अब आप ही बताओ क्या मैं इससे खुश हो सकती हूँ. जो लड़की 40 – 40 मिनिट लगातार लड़को से चुदति है. वो क्या 4 मिनिट मे खुश हो सकती है. इसलिए मैने हार कर उन लड़को . . . . . . ..

जब से मैं शादी करके इस घर मे आई थी. तब से लड़के किसी ना किसी बहाने से मुझे देखने के लिए कोई ना कोई समान लेने आते रहते थे. पर मेरी सासू मा हमेशा घर के आगे ही बैठी रहती थी. इसलिए वो लड़के कभी घर के अंदर नही आए.

सासू मा मुझे आवाज़ मार कर बुलाती और मैं उन्हे वो सामान दे देती थी. वो मुझे देख कर मुस्कुराने लग जाते थे. मुझे लगा की अब ये ही वो लंड है, जो मुझे अच्छे से खुश कर सकते है. इसलिए मैने उन्हे अब पटाने की सोची.

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धीरे धीरे काफ़ी टाइम निकल गया, अब मेरी सासू मा उन्हे अपने बच्चो की तरह समझने लग गयी. सर्दियो का मौसम चल पड़ा था, सर्दी अपने पूरे ज़ोर पर थी. इसलिए जब हम सुबह चाय बनाते थे, तो सासू मा उनके लिए भी मुझसे चाय बनवाती थी.

और अब मैं ही उन्हे सुबह सुबह चाय देने जाती थी. पहले तो मैं बाहर दरवाजे पर ही राहुल को चाय पकड़ा देती थी. राहुल पर मेरा दिल आया हुआ था, क्योकि वो दिखने मे ही एक मर्द लगता था. जब भी मैं उसे चाय देती थी, तब वो मेरा हाथ पकड़ लेता था.

उसका वो छूना मेरी चूत मे हलचल पैदा कर देता था. राहुल भी मुझे छुप छुप कर देखता था. एक दिन सुबह मैं ही उन्हे चाय देने गयी, तो मैने देखा दरवाजा खुला है. इसलिए मैं अंदर ही चली गयी और मैने चाय उनके टेबल पर रख दी.

जैसे ही मैं नीचे झुकी तो मेरे दूध से भर हुए बूब्स के दर्शन उन्हे हो गये. उन सब के मूह खुले के खुले रह गये, सबकी नज़रें मेरे गोरे गोरे बूब्स पर जम सी गयी थी. मुझे अंदाज़ा हो ही गया था, की उन सब के लंड खड़े हो गये है.

क्योकि उनके हाथ अपने लंड पर आ गये थे. फिर मैं वाहा से मुस्कुरा कर वापिस आ गयी. अब मुझे पता चल गया था, की अब ये सब मुझे चोद्ने के लिए पागल हो गये है. पर मुझे उनसे चुदने के लिए एक अच्छा मौका चाहिए था.

पर जब तक मेरे घर मे मेरी सासू मा बैठी थी, तब तक मैं उनके चुदना तो दूर की बात थी. मैं तो उन्हे देख भी नही सॅक्टी थी. मैं तो टाइट ब्रा डॉल कर छत के उपर से ही उन्हे अपने जिस्म के नज़ारे देती रहती थी.

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