मौसी की ननद ने चोदना सिखाया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अनुराग है और में आज आप सभी के सामने अपनी एक कहानी पेश करने जा रहा हूँ जो कि मेरी अपनी एक सच्ची घटना है. दोस्तों यह बात उन दिनों की है जब मैंने कॉलेज में एड्मिशन लिया था. दोस्तों 12वीं तक की पढ़ाई मैंने अपने गाँव से ही की थी, लेकिन हमारे गाँव में 12वीं के आगे की पढ़ाई का कोई भी साधन नहीं था तो इसलिए मुझे अपनी कॉलेज की पढ़ाई के लिए पास ही के शहर में जाना पड़ा. फिर मैंने एक अच्छे से कॉलेज में एड्मिशन ले लिया और यह मेरा पहला ही मौका था जब में अपने घर से बाहर निकला था और इसलिए मेरे घर वाले भी थोड़ी चिंता में थे और में भी थोड़ी टेंशन में था.

तभी हमारे घर मेरी मौसी जो अभी आगरा में रहती है और मेरी मम्मी से मिलने के लिए आ गई और बातों ही बातों में जब उन्हें पता चला कि मेरा एड्मिशन पास के शहर में हो गया है तो उन्होंने मेरी मम्मी से कहा कि अनुराग के रहने का इंतज़ाम में करवा दूँगी, क्योंकि वहां पर मेरी छोटी ननद रेखा रहती है और उसके पति वहीं पर एक बैंक में मेनेजर है और तब जाकर मेरे घर वालो की चिंता कुछ कम हुई. फिर उन्होंने कहा कि हम कल रेखा के घर चलेंगे और इसी बहाने में रेखा से भी मिल लूँगी और अनुराग के रहने का भी इंतज़ाम हो जाएगा. फिर अगले ही दिन पापा, मम्मी, मौसी और में हम चारों शहर के लिए निकल पड़े.

रास्ते में मेरी मौसी ने बताया कि रेखा की शादी को 9 साल हो गये है, लेकिन उसको अभी तक कोई औलाद नहीं है और उसका घर बहुत बड़ा है और रेखा के पति के ऑफिस चले जाने के बाद वो घर पर बिल्कुल अकेली ही रह जाती है और जब अनुराग वहां पर रहेगा तो रेखा का अकेलापन भी दूर हो जाएगा. फिर हम लोग रेखा के घर पहुंच गये, जैसा कि मेरी मौसी ने हमें बताया था कि उनका घर एक शानदार बंगला था और रेखा पूरे दिन उसमें अकेली ही रहती थी तो रेखा ने बड़े प्यार से हमारा स्वागत किया और मौसी की सारी बात सुनकर वो बड़ी खुश हुई और बोली कि में तो कब से इंतजार कर रही थी कि कोई आकर हमारे घर पर रहे और मेरी अपनी कोई औलाद नहीं है तो में इसे अपने बेटे की तरह ही रखूँगी.

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फिर उसके बाद मेरे घर के सारे लोग मुझे वहां पर छोड़कर वापस आ गये. दोस्तों रेखा की उम्र 35 साल थी और वो भरे हुए बदन वाली एक बड़ी ही गोरी और सुंदर औरत थी. उसकी हाईट करीब 5.7 थी और उसके फिगर का साईज करीब 36-30-38 होगा और अगर गौर से देखा जाए तो उसका फिगर और सूरत किसी फिल्म हिरोइन से मिलती थी. फिर शाम को उसका पति मुकेश ऑफिस आ गया, वो भी एक अच्छा खासा था और उसकी आदत भी बहुत अच्छी थी. मुकेश ने मुझे मेरा रूम दिखा दिया और जब में अपना सारा सामान अपने रूम में लगा ही रहा था कि तभी वहां पर रेखा आ गई और फिर वो मुझसे बोली कि बेटा नहाकर नीचे आ जाओ और कुछ खा लो. फिर में नहाने चला गया और नहाते समय मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने अपना सबसे पसंद का काम (मूठ मारना) निपटा दिया. दोस्तों रेखा वैसे दिखने में तो मुझे बहुत सुंदर लगी, लेकिन पहले उसकी चूत लेने का ख्याल मेरे मन मे नहीं आया, क्योंकि हम लोगों की अभी नयी नयी जान पहचान थी.

फिर नहाकर में सीधा नीचे चला गया और खाना खाने के साथ साथ हमने बहुत सारी बातें भी की और में मन ही मन बहुत खुश था कि चलो भगवान की दया से मुझे रहने के लिए एक अच्छी जगह मिल गयी है, लेकिन तब तक मुझे यह बात नहीं पता थी कि मुझे चूत के दर्शन भी यहीं पर होंगे? फिर में खाना खाकर अपने कमरे में सोने चला गया और जब अगले दिन सुबह में उठा तो मैंने देखा कि दस बज चुके है और मुझे कॉलेज भी जाना था इसलिए में हड़बड़ाकर उठा और जल्दी जल्दी नहाया.

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फिर तैयार होकर नीचे चला गया और मैंने नीचे जाकर देखा तो वहां पर कोई भी नहीं था, क्योंकि तब तक मुकेश अपने ऑफिस चला गया था और रेखा पता नहीं कहाँ थी और जब मैंने आवाज़ लगाई तो कोई नहीं बोला और अब में चुपचाप वहीं पर बैठ गया और रेखा के आने का इंतजार करने लगा. फिर मुझे इंतजार करते हुए करीब 20-25 मिनट हो गये, लेकिन तब तक कोई नहीं आया. फिर मैंने सोचा कि चलो चलकर आज पूरा घर ही देख लिया जाए और में सारे कमरो में अंदर जाकर देखने लगा. मैंने सारे कमरे देख लिए, लेकिन एक कमरा जो बिल्कुल कोने में था तो वो मुझसे छूट गया.

फिर मैंने सोचा कि चलो इस कमरे में भी घूम लिया जाए और यह बात सोचकर में उस कमरे की तरफ चल दिया तो वो एक आलीशान बेडरूम था और में जब उस कमरे के अंदर घुसा तो मेरी आखें खुली की खुली रह गई. मैंने देखा कि उस कमरे में रेखा सो रही थी और उसने गुलाबी कलर की जालीदार मेक्सी पहन रखी थी और वो मंद मंद चलने वाली हवा से उसके पैरों से हटकर अब उसके पेट तक आ चुकी थी. दोस्तों मैंने इतनी गोरी और चिकने पैर आज तक कभी नहीं देखे थे और मेरा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया था, लेकिन मैंने जैसे तैसे अपने आप पर बहुत कंट्रोल किया और फिर दरवाजा बजाया, लेकिन फिर भी वो नहीं उठी तो मैंने सोचा कि में रेखा को हिलाकर जगा दूँ और जैसे ही में उसे हिलाकर जगाने के लिए आगे बढ़ा तो वो एकदम से उठकर बैठ गई और बोली कि क्या हुआ तुम यहाँ पर कैसे?

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