मैंने देखा पापा चाची की चुदाई कर रहे थे

इधर एक बात तो तय थी कि चाची पापा से चुदना चाहती थीं क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता.. तो वो चिल्ला सकती थीं या हम दोनों को आवाज देकर जगा सकती थीं, जिससे पापा उनसे अलग हो जाते।

चाची ने पापा का हाथ हटाने की सिर्फ दो बार कोशिश की और फिर शांत हो गईं, शायद उनको मजा आने लगा था।

पापा ने हाथ से पूरे पेट पर सहलाया। अब चाची भी थोड़ी शांत हो गई थीं। पापा ने साड़ी के पल्लू के नीचे से हाथ डालकर चाची के चूचों के ऊपर रख दिए और दबा दिए।
चाची थोड़ी कसमसाईं और पापा के हाथ के ऊपर हाथ रख दिया, पर हटाया नहीं।

मुझे लाइव ब्लू-फिल्म देखने में मजा आ रहा था। मैं देखना चाहता था कि आगे क्या होगा।

मैं जरा भी नहीं हिल रहा था, तभी मैंने देखा पापा ने एक पैर भी चाची के ऊपर रखा, मतलब पापा लगभग पीछे से चाची के ऊपर चढ़ गए थे।
पापा की इस स्थिति से मुझे और झटका लगा क्योंकि पापा ने लुंगी निकाल दी थी सिर्फ अंडरवियर में थे.. इससे चाची भी उस वक़्त चौंक सी गई थीं।

पापा ने पीछे से चाची की पीठ पर चुंबन करना शुरू कर दिया। इससे चाची को गुदगुदी हुई और वो थोड़ा सीधे होकर लेट गईं.. लेकिन चाची ने आँखें नहीं खोलीं। सीधा लेटने के बाद पापा का हाथ चूची पर और एक पैर चाची के दोनों पावों पर था। अब पापा चाची को अँधेरे में निहार रहे थे, पर उस वक़्त सब्र किसे होता है। पापा ने अपने होंठों से चाची के गाल पर किस किया और अपने हाथों से चाची की चूची को दबाने लगे। पापा चाची की चूची को बहुत आराम से पकड़ कर छोड़ते हुए मजा ले रहे थे.. और चुम्मी भी लेते जा रहे थे।

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अब चाची के चेहरे पर साफ ख़ुशी दिख रही थी.. पर थोड़ी टेंशन भी नजर आ रही थी। वो टेन्शन शायद हम दोनों भाईयों के बगल में सोने के कारण थी।

पापा ने अपने होंठ चाची के होंठ पर लगाने चाहे.. तो चाची ने मुँह फेर लिया शायद चाची अभी पूरी तरह से खुल नहीं पाई थीं। शायद उनकी निगाह में सब गलत हो रहा था और इस वक्त बाजू में हम दोनों भी सोये हुए थे।

चाची के होंठ पर किस ना करने से पापा उनके गले पर किस करने लगे और पूरा गले पर ऐसे चुम्बन किया, जैसे गले में से कोई खास मलाई का स्वाद मिल रहा हो। चूमा-चाटी के कारण चाची बहुत गर्म हो गईं और उन्होंने भी अपना हाथ पापा के सर के बालों पर फेर दिया।

अब पापा ख़ुशी से चाची को देखने लगे, पर चाची ने अब भी आँख नहीं खोलीं।

फिर पापा ने चाची का पल्लू हटा दिया और ब्लाउज के बटन खोलने में लग गए। तभी चाची ने पापा के हाथ को फिर रोकने की कोशिश की, पर पापा ने इस बार थोड़ा जबरदस्ती करते हुए बटन खोल दिए। फिर पापा ने चाची के ब्लाउज को हटा कर ब्रा के ऊपर से चूचियों पर चुम्बन किया और दोनों चूची के बीच में जो जगह होती है.. वहां अपनी जीभ फेरते हुए एकदम से ऐसे चाटने लगे, जैसे खाने को कोई नया पकवान मिल गया हो।

पापा के जबरदस्ती बटन खोलने से चाची ने एकदम से डर कर आँखें खोलीं और गुड्डू और मेरी तरफ देखा कि हम सोये हुए हैं या नहीं।

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मैंने हल्की सी आँख खुली रखी थी, इसलिए चाची को अँधेरे में पता नहीं चल सका।

उधर पापा ने पूरा ब्लाउज हाथ तक निकाल कर चाची की बगल भी चूम ली। चाची भी अब मदहोश हो रही थीं, शायद ऐसा कभी चाचा ने नहीं किया था।
अब पापा चाची के ऊपर चढ़ गए और चाची को देखने लगे, चाची ने अपनी आँखें फिर से बंद कर लीं।

पापा ने चाची के कान में कहा- उम्म्ह… अहह… हय… याह… तुम बहुत खूबसूरत हो और टेस्टी भी..!
चाची ने पापा को ऊपर से हटाने की कोशिश की, क्योंकि चाची हम दोनों भाईयों की मौजूदगी में हद में रहना चाहती थीं।
पर पापा कहाँ मानने वाले थे, पापा ने चाची के चुचे जोर से दबाने शुरू किए.. तो चाची को हल्का सा दर्द हुआ, चूची दबाने की वजह से से चाची ने दबे स्वर में आवाज भी निकाली।

खैर.. चुदास चढ़ चुकी थी, सो चाची पापा का साथ देने लगीं। अब चाची का एक हाथ पापा की पीठ पर फिर रहा था और दूसरा पापा के बालों में था।
यह हिंदी चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

आगे देखते हैं कि जेठ-बहू की ये रसीली चुदाई की कहानी क्या गुल खिलाती है।
मुझे अपने ईमेल भेजिएगा।

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