मा को रंडी बनते देखा

हेलो, मेरा नाम अंजलि गई और मेरी उमर अभी 24 साल की है. मैं दिखने मे काफ़ी सुंदर हूँ और मेरा जिस्म तो मानो एक रंडी का जिस्म है. मैं गोआ की रहने वाली हूँ और अपने मम्मी और दादी के साथ गोआ मे ही रहती हूँ. हुमारे घर मे सिर्फ़ हम तीन ही लोग है और इसमे से पापा भी बिज़्नेस के चक्कर से बाहर ही रहते है.

इसलिए मैं और मम्मी ही घर पर रहते है. आज मैं आपके लिए एक दम अछी और सचि कहानी ले कर आया हूँ. जिसको पड़ कर आपको सबको खूब मज़ा आने वाला है. पर उससे पहले मैं आपको थोडा अपने बारे मे बताना चाहती हूँ.

मेरा नाम तो आप जान ही चुके हो इसलिए अब मैं तोड़ा और कुछ आपके लिए अपने बारे मे बतती हूँ. मेरा रंग एक दम गोरा है और मेरी आँखे एक दम मोटी मोटी है जिस पर हर कोई डुलता फिरता है. अब मेरे होंठो की बात करते है जो की बहोत ही मस्त है और पतले- पतले होंठ है. जिसको देख कर हर किसी का मान करता है की वो मेरे होंठो को चूस – चूस कर बस खा जाए.

अब आता है मेरा फिगर जो की अब 36-32-36 का है जिसको देख कर आचे – अच्छे का लंड खड़ा हो जाता है. और सबका बस यही मान करता है की वो मुझे बस अपने नीचे लंबा पा कर चोद डाले.

ये सब तो मैने अपने बारे मे थोड़ा बता दिया है. पर अब मैं अपनी मॉं के बारे मे बताती हू जिसके उपर मेरी ये कहानी है. मेरी मॉं जिनका नाम सुषमा है और वो 35 साल की है. मेरी मॉं का फिगर तो मुझसे भी ज़्यादा कमाल का है. ये सब मैं ही नही बल्कि हर कोई कहता फिरता है.

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मेरी मा का फिगर 38-32-38 है. अब ये देख कर तो आप अंदाज़ा लगा ही सकते हो की मेरी मों कितनी कमाल की होगी. चलो अब मैं आपको बतती हूँ की ये कहानी तब की है जब मैं 19 साल की थी. वेसए तो मैं जब उससे भी छोटी थी और स्कूल जाती थी तब भी मुझे काई बार अपनी मम्मी पर थोड़ा शक्क होता था. पर मम्मी हमेशा ऐसे बिहेव करती थी जिससे मुझे सब नॉर्मल लगता था और मैं कुछ समझ ही नही पाती थी.

एक दिन की बात है मैं स्कूल से घर जल्दी आ गई तो मैने घर पर एक अंकल को देखा. मेरे अंदर आते ही वो अंकल मम्मी को टाटा कह कर चला गया. फिर मम्मी ने भी मेरे साथ नॉर्मल बिहेव किया जेसे की कुछ हुआ ही ना हो. ऐसे ही रात आ गई और फिर मम्मी मुझे सोते समये उन अंकल के बारे मे बताने लग गई और कहने लग गई की वो तो कुछ ठीक करने आए थे. तब मैं छोटी थी इसलिए मैने इन सब बातो पर ज़्यादा ध्यान नही दिया और ना ही कभी सोचा की ये क्या होता है.

मैने ऐसे ही काई बार अंकल को आते हुए देखा पर मैं हुमेशा चुप ही रह जाती थी. क्योकि मुझे तब कुछ भी समझ नही आ पता था. ऐसे ही मैने एक दिन वॉशरूम मे कॉंडम पड़ा हुआ देखा जो की मम्मी की ब्रा और पनटी के साथ पड़ा था. मैने इस बारे अपनी स्कूल फ्रेंड्स से भी डिसकस किया था तो मुझे पता था की कॉंडम किस कम आता है. मैने जब वॉशरूम मे कॉंडम पड़ा देखा तो मैने ते भी ध्यान दिया की उस पर किसी का पानी निकला हुआ था. तब मुझे अपनी मॉं पर विश्वास नही रा.

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ये सब देखते हुए मैं थोड़ी बड़ी हो गई थी और अब काफ़ी कुछ समझने लग गई थी. मैं जब भी स्कूल से आती तो मम्मी हमेशा मुझे नॉर्मल बिहेव करती हुई मिलती थी जेसा की कुछ हुआ ही ना हो. और मुझे खाना दे कर खुद सो जया करती. अब मैने भी सोचा की एक दिन मैं भी स्कूल नही जाऊंगी और घर से निकल कर घर के पीछे ही छुप जाऊंगी. ये फिर मैने अगले ही दिन किया. मैं घर से निकल गई और घर के पीछे आ कर छुप गई.

मैने देखा की मेरे जाने के एक घंटे बाद मम्मी फोन पर किसी से बात कर र्ही थी. तब मैने उनकी बाते सुनने के लिए कान खिड़की को लगाया और बात सुनने लग गया. मम्मी बड़े ही पायर से किसी से बात कर रही थी और उनसे पूछ रही थी की कितने कस्टमर है. और फिर पता लगने पर उन्होने हाँ करदी और घर पर कुछ ज़्यादा ही पैसो की अमाउंट बोल कर आने को कहा और साथ ही साथ उनको 4 बजे तक का टाइम दे दिया. क्योकि मम्मी जानती थी की मैं अब बड़ी हो गई हूँ तो मैं ये सब समझती हूँ.

मैं अब चुप चाप वाहा पर खड़ी थी और मम्मी को घर के कम जल्दी जल्दी ख़तम करते हुए देख रही थी. मम्मी ने जल्दी से काम ख़तम किए और फिर मम्मी नहा धो कर तैयार हो गई.

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