लंडन मे रंडी खाना

हेलो दोस्तो मेरा नाम सिमरनजीत सिंग है. सब लोग मुझे प्यार से सिमरन ही कहते है. और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ. पर मुझे घर वालो ने मुझे लंडन पढ़ने के लिए भेज दिया था. क्योकि वो मुझे शुरू से ही बाहर भेजना चाहते थे. और स्टडी वीसा से लंडन जाना बहोत ही आसान है. इसलिए मैं वाहा चला गया. मेरी उमर उस टाइम 17 साल थी और आज मेरी उमर 21 साल हो गई है.

मैं शुरू से ही एक चुदक्कड़ था. मैने शुरू से ही बहोत सारी आंटियो को चोदा था. मैने अपनी सग़ी चाची और सग़ी टाई तक को नही छोड़ा था. अपने गाओं मे रहेते वक़्त मुझे चूत की कमी कभी भी महसूस नही हुई. क्योकि मैने अपने घर के साथ वाली लड़की रमण को फसाया हुआ था. मैं हर रात उसको उसके घर मे जा कर चोदता था. उसकी चूत को मैने बहोत चोदा और उसके साथ अपनी जवानी के पूरे मज़े लिए.

उसके बाद मैं लंडन मे आया. और कुछ ही दीनो मे मैं स्टडी को बाइ बाइ कह दिया और वाहा पर जॉब करने लग गया. मुझे कुछ ही देर काम करने से काफ़ी पैसे मिल जाते थे. जिससे मैं बहोत एंजाय करता था. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

दोस्तो मैं बता दूँ यहा पर लंडन मे आप सब कुछ ले सकते हो अगर आपके पास पैसे हो तो. और मुझे सब से ज़्यादा अच्छी बात ये लगी की. आप जिससे चाहे जब चाहे सेक्स कर सकते हो. आप को वाहा कोई नही रोकेगा.

यहाँ तक की जब कोई लड़की यहा 18 साल की हो जाती है. तो उसके घर वाले उससे खुद चुदने के लिए भेजते है. क्योकि यहा 18 साल की लड़की कही पर भी सेक्स कर सकती है. पर अगर आप किसी 18 साल की कम उमर की लड़की से सेक्स कर रहे हो. तो आप के लिए ये डरने वाली बात है. क्योकि अगर आप पकड़े जाते हो तो वो आप को यहा कोई बचाने वाला नही मिलेगा.

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दोस्तो आज मैं आप को बताऊंगा कैसे मैं यहा लंडन मे एक आंटी को पहले फसाया. और फिर उसे कैसे अपनी रंडी बना कर अपने दोस्तो से भी चुदवाया और खूब पैसे कमाए. दोस्तो मुझे पता है की ये ग़लत है. पर दोस्तो मैं बता दूँ की जिंदगी का असली मज़ा इसमे ही है. अगर हमे किसी चूत की प्यास बुझाने से पैसे मिल रहे हो तो इसमे बुराई ही क्या है. तो चलिए मैं अब आप को शुरू से सब कुछ बताता हूँ.

उस दिन मैं अपनी जॉब पर नही गया. क्योकि उस दिन मेरा मन नही कर रहा था. मेरे सारे दोस्त अपनी जॉब पर चले गये थे मैं अकेला घर पर था. इसलिए मैं बहोत बोर हो रहा था. तभी मेरे माइंड मे आइडिया आया की मैं क्यो ना बाहर घूमने जाऊ. और सेंटर लंडन से अपने लिए कुछ नये कपड़ो की शॉपिंग भी कर लूंगा. इसलिए मैं जल्दी से तैयार हुआ और वाहा जाने के लिए ट्रेन पकड़ ली. ट्रेन मे उस दिन ज़्यादा रश नही था. इसलिए मैं आराम से सीट पर बैठ कर न्यूज़ पेपर रीड करने लग गया.

ऐसे ही कुछ स्टेशन निकल गये पर एक स्टेशन पर मेरे सामने वाली सीट पर एक आंटी आ कर बैठ गई. उसको देख कर मैं हैरान सा रह गया क्योकि उसने इंडियन सलवार सूट डाला हुआ था. सच कहु दोस्तो वो उसमे मुझे पटाका लग रही थी. मेरी नज़र बार बार उस पर जा रही थी. मेरा लंड उसको देख कर खड़ा होने लग गया. उसको देख कर ऐसा लग रहा था की उसकी उमर कम से कम 35 साल तो होगी ही.

मैं अपना न्यूसपेपर पढ़ रहा था पर बार बार उसको भी देख रहा था. उसके सेक्सी होंठ और उसके सेक्सी बूब्स देख कर मैं पागल सा होने लग गया था. मेरा लंड खड़ा होने लग गया था. मेरी नज़र 2 सेकेंड बाद अपने आप उसके उप्पर चली जाती. आख़िरकार कुछ देर बाद वो बोली क्या आप इंडियन हो. मैने कहा हाँ मैं इंडियन क्या आप भी इंडियन हो. उसने हाँ फिर हम दोनो हिन्दी मे बात करने लग गये.

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ना जाने मैं क्यो उसका दीवाना सा होता जा रहा था. मैं चाहता था की ये ट्रेन कभी ना रुके और मैं उससे ऐसे ही बातें करता रहूं. फिर उसने मुझे बताया की उसका स्टेशन आने वाला है. अब मुझे लगा की मैं उससे उसका नंबर माँग लू ताकि मैं उससे बात करता राहु. पर मेरी ना जाने क्यो इतनी गांड फट रही थी. जब उसका स्टेशन आने वाला था तो उसने मुझे कहा की चलो फिर बात करते है.

ये सुनते ही मैने कहा की कैसे मिलते है आप कौन सा रोज मुझे इस ट्रेन मे मिलने वाली है.तो उसने मुझे कहा की हाँ तुम ठीक कह रहे हो, ऐसा करो तुम मुझे अपना नंबर दे दो. ये सुनते ही मेरे दिल मे खुशी के लड्डू फूटने लग गये. मैने झट से अपना नंबर उसे दे दिया. और फिर वो अपने स्टेशन पर उतर गई और मैं आगे चला गया. वाहा पर जा कर मैं थोड़ी सी शॉपिंग करी और वापिस आ गया.

पूरे रास्ते वो मेरे माइंड मे थी. उसकी आवाज़ मेरे कानो मे गूँज रही थी. ना जाने क्यो मैं उसका दीवाना सा क्यो होता जा रहा था. फिर मैं घर आया और सब से पहले उस आंटी के नाम की मूठ मारी और अपने आप को और अपने लंड को शांत किया. फिर मैं उसके कॉल का वेट करने लग गया. अगले 2 दिन तक उसका कोई कॉल नही आया मेरा दिल टूट सा गया था.

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