कामुकता पुणे आंटी की चुदाई

मैं- आंटी लग रहा है काफ़ी दीनो से नही चुदि हो.

आंटी- हान जान, तुम सही कह रहे हो आज दो साल बाद लंड अंदर ले रही हूँ, क्या करें जब से वो बीमार पद गये तब से मैने काफ़ी सब्र किया है बेटा.

मैं- आंटी आप की चुत बहुत टाइट है, किसी से चुदि क्यों नही.

आंटी- समाज के डर से कहीं जोशुआ नही की लेकिन जब एक दिन मैं काफ़ी गरम हो कर अपनी चूत में उंगली कर रही थी तो मेरे दिमाग़ में आइडिया आया की क्यों ना कॉल बॉय की मदात ली जाय, फिर हमने आपका एड देखा और कॉंटॅक्ट किया.

मैं- फिर इस तरह धीरे धीरे बातें करते हुए एक ज़ोर का धक्का दिया और पूरा लंड दनदनाते हुए अंदर चला गया, आंटी ज़ोर से चीखी पर मैने अपने हाथ से उनका मुँह बंद कर रहा था.

आंटी- मार डालोगे क्या, धीरे धीरे करो यार.

कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कॉमेंट सेक्षन मे ज़रूर लिखे, ताकि देसीकाहानी पर कहानियों का ये दौर आपके लिए यूँ ही चलता रहे.

मैं- अरे आंटी घबराती क्यों हो अभी तो शुरुआत है.

फिर इस तरह मैने धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ाया और उनको ज़ोरदार स्ट्राइक से करने लगा, आंटी सिसकियाँ लें रही थी और पूरा रूम फ़च फ़च, आह, आ एम्म्म, ह्म से गूंजने लगा, इस तरह मैने आंटी को लगभग दस मिनिट तक चोदता रहा.

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