जानू कितना चोदोनगे आज !!!

दोस्तो मैं रॉबिन आ गया हुए एक नयी कहानी लेकर, दरअसल ये देसी सेक्स स्टोरी मेरी पिछली कहानी “सेक्सी रेणु आंटी की चुत चुदाई” का सेकेंड पार्ट है, इसलिए जिन्होने मेरी ये वाली पिछली कहानी नही पढ़ी वो आज वाली कहानी का भरपूर आनंद लेने के लिए वो ज़रूर पढ़े.

इतने सालो बाद रेणु आंटी को चोदने की इछा पूरी होने के बाद मैं बहुत सुकून महसूस कर रहा था, लेकिन मेरा मन अभी भी नही भरा था.

आंटी को और चोदने की चाहत मेरे दिल में ज़ोर पकड़ रही थी, बदक़िस्मती से रेणु आंटी के हज़्बेंड इंडिया आ रहे थे, मैं और आंटी दोनो उनको रिसीव करने जा रहे थे, आंटी ड्राइव कर रही थी, मैं पास वाली सीट पर बैठे बैठे आंटी के बूब्स दबा रहा था और केर्फुली चूस भी रहा था, गाड़ी के विंडो ग्लास ब्लॅक फिल्म कोटेड थे इस लिए मैं बेखौफ़ मज़े ले रहा था.

आंटी का ध्यान भटक रहा था इसलिए वो मुझे माना कर रही थी, मैने कहा एक तो अभी मेरा मन अभी भरा नही उस दिन आपको चोदके और उपर से आपके हज़्बेंड भी आ रहे हैं, अब मेरा क्या होगा ? आंटी ने बोला डरो मत जान मैं हू ना, कर लूँगी कोई जुगाड़, तुम्हारे अंकल काम से आ रहे हैं यहा सारा टाइम घर नही रुकेंगे.

खैर हम अंकल को एरपोर्ट से लेकर उनके घर आ गये, दो दिन के बाद अंकल पंजाब आने वाले थे, 2 दिन के बाद मुझे अंकल ने खुद ही कॉल किया की रॉबिन तुम और रेणु मुझे एरपोर्ट ड्रॉप कर आओ.

मैं फटाफट तैय्यार हो कर उनके घर चला गया, मेरे मन मे तो जैसे मोटी चूर के लड्डू फुट रहे थे, उनके घर पहुचा तो वो दोनो रेडी बैठे थे, अंकल के सामने आंटी बहुत फॉर्मल बिहेव कर रही थी, घर से निकलने के बाद 1 घंटे मे हम एरपोर्ट पहुच गये.

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गाड़ी से उतार के अंकल ने मुझे बाइ बोला और आंटी से बोले के इसे लंच किए बिना मत जाने देना, मैने मन ही मन सोचा आप जाओ तो सही…आप जानते भी नही मैं क्या क्या करूँगा, रिटर्न आते आते मैं और आंटी बहुत ईज़ी एंड रिलॅक्स फील कर रहे थे, मैं फिरसे गाड़ी में ही उनको चूमना और चूसना शुरू कर दिया.

आंटी भी गरम हो रही थी, एक बार तो हमने गाड़ी एक सुनसान जगह लगा के जी भर के किस्सिंग और स्मुचिन्ग भी की, फिर हम जल्दी जल्दी घर पहुचे, देखा तो उस दिन लिफ्ट भी बंद थी, हम 5थ फ्लोर तक फटाफट सीडीयाँ चढ़कर आए और सीधा बेडरूम में आकर पागलो की तरहा एक दूसरे के मूह में मूह डाल के किस करने लगे.

मैने बारी बारी आंटी के सारे कपड़े उत्तार दिए और फिर खुद भी नंगा हो गया, हमने एक दूसरे को कस के अपनी बाहों में ले लिया, सीडीयान चढ़ने की वजह से हम दोनो पसीना पसीना हो गये थे, आंटी बोली रॉबिन बेबी बाथरूम मे चलते हैं, शोवेर के नीचे एक रोमॅंटिक चुदाई करेंगे और जी भर के ईक दूसरे को चूमेंगे.

फिर हम दोनो बाथरूम में चले गये, मैने हल्का सा शोवेर ऑन किया और आंटी ने एक दम से मेरे मूह मे मूह डाल लिया, मैं और आंटी बिछड़े प्रेमियों की तरहा एक दूसरे को चूम रहे थे, कभी मैं उनके होंठ गाल और बूब्स चूस्ता और कभी आंटी चूमने में मगन हो जाती, शोवेर की वजह से एक बारिश वाला माहौल बना हुआ था.

फिर मैने कंट्रोल लिया और आंटी को दीवार के साथ खड़ा कर दिया और उनका फेस भी दीवार की तरफ करके उनके दोनो हाथ उपर दीवार के साथ लगा दिए और पीछे से आकर उनको सारी बॉडी को चूमने लगा, उनके गुलाबी गाल..नेक,,और उनकी गॅंड पर मैने किस की बारिश कर दी, आंटी का बदन ठंडे पानी में भी गरम हो रहा था.

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फिर मैने पीछे से ही उनके बूब्स पकड़ के दबाने शुरू कर दिए और आंटी ने ऊऊऊऊओ !! उूुउउ !!! सिसकियाँ भरनी शुरू कर दी.

फिर मैने आंटी का मूह अपनी तरफ किया और उनको स्मूच करने लगा, रसीले होंठ चूसने के बाद मैं आंटी के बूब्स की तरफ बड़ा, आंटी के बूब्स पर पानी ऐसे लग रहा था जैसे कमल के फूल पर शबनम की बूंदे गिरी हो.

आंटी के गोरे गोरे बूब्स मेरे दबाने से लाल गुलाबी हो गये थे और सच में किसी कमल के फूल की तरहा लग रहे थे, मैने प्यार से उनके बूब्स को मूह में ले लिया और मधुमाखियो की तरहा उनके बूब्स का रस्स चूसने लगा.

आंटी ऊओउुउउ!! उुउऊहह !! करके मदहोशय्ओं में खो गयी, मैने बारी बारी आंटी के निप्पल्स चूस और चबा रहा था, ऐसे ही करीब 15-20 आंटी के बूब्स के साथ खेलने के बाद मैने उन्हे मौका दिया मेरी बॉडी को केर करने का, आंटी नीचे घुटनो पर बैठ गयी, लंड को सहलाते सहलाते वो मेरे टेस्ट को सक करने लगी.

फिर लंड जैसे ही पूरी तरहा खड़ा हुआ तो आंटी ने लंड का टॉप मूह मे लिया और लोलीपोप बना के चूसने लगी, धीरे धीरे उन्होने पूरा लंड अंदर लेना शुरू कर दिया, चूस चूस के आंटी ने लंड का लोहा बना दिया, अब मुझसे और सबर हो नही रहा था, मैने आंटी को खड़ा किया एक लंबी किस की और उन्हे दीवार के साथ घोड़ी बना दिया.

पिछली बार मैने उनकी गॅंड से शुरूवात किथि, इस बार मैने उनकी चूत पर लंड रखा और एक झटके में पूरा का पूरा अंदर डाल दिया, आंटी की ज़ोर से अहह !! निकल गयी, वो बोली जान जर्रा प्यार से काररो…बट मेरा मन आज शैतानी रूप धारण कर चुका था.

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