होली का दिन या चुदाई का दिन

हेलो दोस्तो, कैसे हो आप सब, मेरा नाम शालु है और मेरी उमर 26 साल की है. मैने आज से पहले भी बहोत सारी कहानिया आपके लिए लिखी है और अपने भी उन सभी कहानियो को काफ़ी अच्छे से सराहा है.

मुझे ये जान कर काफ़ी खुशी मिली है की आपको मेरी सब कहानिया काफ़ी ज़्यादा अच्छी लगी है और यही उमीद रखती हूँ की मेरी आगे की सारी कहानिया भी आपको बहोत पसंद आएगी.

वैसे मैं अपने मूह से ही अपनी तारीफ नही करना चाहती पर ये सच है की मेरी कहानिया पढ़ कर सबके लंड और चूत पानी छोड़ने लग जाते है. और यही सब देख कर मुझे काफ़ी खुशी मिलती है.

आज भी मैं अपनी एक बीती कहानी आपके लिए लाई हूँ पर वो कहानी बताने से पहले मैं आपको अपने बारे मे थोड़ा कुछ बताने जा रही हूँ.

तो दोस्तो, मेरा नाम तो आप जान ही चुके हो और अब मैं आपको वैसे ही थोड़ा अपने बारे मे बता देती हूँ. ताकि आपको ज़्यादा कोई परेशानी ना हो. मेरी उमर 26 साल है और मैं दिखने मे काफ़ी ज़्यादा सुंदर हूँ.

ये सब मैं नही सारी दुनिया ही कहती है. क्योकि मेरा रंग गोरा है और इस गोरे से चेहरे पर नशीली दो आँखे है जो की हर किसी को मेरा दीवाना बना देती है. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

फिर आते है मेरे होंठ जो की बहोत मस्त है और वो हर समये एकदम गुलाबी रहते है जिस पर मुझे लिपस्टिक लगने की भी ज़रूरत नही पड़ती है. उसके बाद अब मेरे गोरे गोरे गाल आते है जो की एक बच्चे की तरह गोलू- मोलु है. और उस पर बहोत ही प्यारे प्यारे दो टिल है जो की मेरे चेहरे की खूबसूरती को और निखार कर लाते है.

यह सब तो हो गया मेरे चेहरे के बारे मे. अब मैं आपको अपनी फिगर के बारे मे भी बता ही देती हूँ. मेरी फिगर 34- 38-32 की है. जिसको देख कर हर लड़का मुझ पर डोलता है और मुझसे फ्रेंडशिप कर मुझे चोदना चाहता है.

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कॉलेज टाइम मे भी मेरे उप्पर काफ़ी ज़्यादा लड़के मरते थे और हर कोई मुझे अपने नीचे लेना चाहता था. पर तब मैने किसी को भी हाँ नही करी थी क्योकि मुझे ऐसे लड़को को तड़पना बहोत ही ज़्यादा पसंद है.

दोस्तो, ये तो हो गया मेरे बारे मे. अब मैं आपको अपनी कहानी पर ले चलती हूँ.

ये कहानी होली के दिन की है. अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं थोड़ा इस होली के पवन त्योहार के बारे मे बता देती हूँ. आप सब ये तो बहोत अच्छे से जानते होंगे की होली का त्योहार रंगो का त्योहार होता है. और उस त्योहार मे हर कोई रंगो मे घुलना चाहता है.

रंग भी हमे यही बताते है की हमे एक दूसरे के जीवन को खुशियो से, इन रंग बिरंगे कलर्स से उनकी ज़िंदगी को भर देना चाहिए. जिससे उसकी ज़िंदगी मे खुशिया ही खुशिया शामिल हो जाए.

अब मैने होली के इस त्योहार के बारे मे बता दिया है. अब मैं अपनी कहानी सुनती हूँ.

मेरे प्यारे दोस्तो, मेरी अब शादी हो रखी है और मैं अपने ससुराल मे बहोत ज़्यादा खुश हूँ. मेरे पति एक इंजिनियर है और वो मुझसे काफ़ी ज़्यादा प्यार करते है.

मैं भी उनसे काफ़ी ज़्यादा प्यार करती हूँ. मेरी शादी को अभी 8 महीने ही हुए है. और मेरा फिगर अब बहोत ही ज़्यादा मस्त हो चुका है. मेरे ससुराल मे मेरे पति, सास और ससुर ही रहते है.

सास-ससुर मुझसे बहोत ज़्यादा प्यार करते है और वो मेरी हर एक खुशी का बहोत ख्याल रखते है. मेरे ससुराल मे मुझे कपड़े पहनने पर भी कोई रोक-टोक नही है की मैने ये कैसे कपड़े पहने है. जो दिल चाहता है मैं वो कपड़े पहेन सकती हूँ.

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सच कहु तो मैं अपने ससुराल मे बहोत खुश हूँ और एक मा को अपनी बेटी के लिए और क्या चाहिए होता है. वो तो बस इतना चाहती है की उसकी बेटी ससुराल मे रानी की तरह खुशी खुशी ज़िंदगी बिताए.

ठीक उसी तरह मेरे साथ भी वैसा ही हो रहा था. और अब तो मुझे मयके जाने की भी बहोत ज़्यादा खुशी थी. क्योकि मेरी शादी के बाद अब पहली होली थी और ये होली मेरी मेरे मयके मे होनी थी.

जब होली का त्योहार आया तो मैं और मेरे पति मेरे मयके के लिए घर से सुबह सुबह ही निकल पड़े. वाहा पहोच कर मैं बहोत खुश थी. और जैसे ही घर पहोचि तो मेरी बहनो ने और मेरी फ्रेंड्स ने हमे पूरे रंगो मे भिगो दिया था.

ऐसा करवाने मे मुझे तो बहोत मज़ा आया था और मैं पूरी तरह भीग चुकी थी. मैने टी- शर्ट डाल रखी थी जो की पूरी तरह भीग चुकी थी और मेरी अब ब्रा भी दिखने लग गई थी.

तब मेरी मम्मी ने मुझे ठंड ना लग जाए इसलिए उप्पर वाले कमरे मे जा कर कपड़े चेंज करने को कहा. उनकी ये बात सुन कर मैं उप्पर वाले कमरे मे चली गई.

उधर मेरे पति नीचे सबके साथ खेल रहे थे और फिर मम्मी के बुलाने पर उनके साथ बैठ कर बाते मार रहे थे. वो दोनो बहोत अच्छे से बाते मार रहे थे और काफ़ी हस भी रहे थे. ये देख कर मुझे बहोत ज़्यादा खुशी मिल रही थी.

फिर मैं उप्पर वाले कमरे मे आ कर दरवाजा बंद कर दिया और लॉक लगा दिया. उस कमरे मे बैठ कर अपने कपड़े उतार रही थी और वाहा पर लाइट भी ऑन थी क्योकि वाहा से मुझे कोई देख नही सकता था.

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