देवर ने की सेक्सी भूखी भाभी की चुदाई

Dever ne ki sexy bhukhi bhabhi ki chudai – hindi me sex story

Dever ne ki sexy bhukhi bhabhi ki chudai - hindi me sex storyहेल्लो दोंस्तो मेरा नाम कोमल है, और मैं भटिंडा पंजाब की रहने वाली हु। मुझे सेक्स की बहोत भूख है, यह कहानी मेरी और मेरे देवर रंजित की चुदाई की है। मैं काफी स्लिम हूँ मेरी उम्र 31साल हैं शादीशुदा हूँ फीगर 34-30-34 हैं। रंग गोरा हैं मॆं सम्भोग की भूखी हूँ शादी से पहले मेंने कभी सेक्स नहीँ किया था पर अब रहा नहीँ जाता।

रंजित की लम्बाई 5’10” हैं एक दम जिम वाली कसी बनावट का मलिक हैं रंजित। उम्र कोई 29-30 साल हैं। मेरे पती एक लिमिटिड कम्पनी मॆं काम करते हैं। जब मेरी नयी नई शादी हुई थी तो मेरे पती मेरे साथ बहूत चुदाई करते थे। मुझे खाने से ज्यादा सेक्स की भूख रहने लगी। फ़िर 3-4 साल बाद तो हम बस नाम के लिए ही सेक्स करते थे कोई ऊतेज्न या रूचि वाला सेक्स नहीँ था हाँ रोज़ उनके काम पर जाने के बाद में रोज़ ब्ल्यू फिल्म देखती थी। और मेरे अंदर की आग और भी भड़क जाती थी।

इसी बीच हमारे घर रंजित का आना जाना बढ़ गया था बहूत ही हंसमुख हैं वो अक्सर मेरे पती के साथ आ जाता था एक दिन मेरे पती ने उसे मेरे घर किसी काम से दोपहर में ही भेज दिया था। मेरे पती ने मुझे फोन कर के बताया की रंजित आ रहा हैं इस वक़्त मॆं नाईटी में ही थी रॉयल ब्लू रंग की थी जौ की मेरे पती को बहूत पसन्द थी। खैर मैं मेरे रुटीन के अनुसार लॅपटॉप पर कहानी पढ़ रही थी और बहूत गरम थी।

रंजित ने घंटी बजाई और मेंने दरवाजा खोला सामने रंजित थे मेंने उन्हे हल्लौ किया तो उन्होने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया। मेंने अंदर बुलाया और हाल मॆं बैठने को बोला। अब मैं रसोई से आ रही थी तो मेंने गौर किया वो मेरे गोरे मांसल पैरों को देख रहा था क्योंकि मेंने नाईटी पहन रखी थी जौ की घुटनो से थोड़ी ही नीचे थी। वो लगातार घूर रहा था फ़िर मेंने ऊपर के बटन भी थोड़े खोल रखे थे तो जैसे ही पानी देने के लिए थोड़ी झुकी तो उसे मेरे गोरे रसीले संतरों के भी दीदार हौ गयी।

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अब वो मेरे संतरे साइज़ के चूचे देख कर गरम हौ रहा था आज से पहले मेंने उसके बारे में कभी गलत नहीँ समझा था। पर आज चूँकि मैं अभी अभी कहानियाँ पढ़ के गरम थी तो मेरा भी मन फिसल रहा था। मेंने बहूत इत्मीनान से पूरे दर्शन कराए और सीधी हौ गयीं अब उसके पेंट मॆं भी उभार था।

हाये राम कम से कम 8″ का लम्बा लन्ड था और खूब मोटा लग रहा था मेरे पती का तो 6″ का ही होगा। मेरी नज़र भी उन्होने देख ली थी वो थोड़ा असहज हौ गये मेने भी माहौल को हल्का करने के लिए पूछा ” और भाई साहब घर पे सब ठीक हैं ना?” तो वो चौंकते हुए बोले जी भाभीजी सब ठीक हैं अब मैं उनका गिलास वापिस उठाने के लिए झुकी वो फ़िर मेरे संतरे देख रहे थे इस बार मेंने भी एक सेक्सी मुस्कान दी और रसोई मॆं चली गयीं। जाते समय मेंने पिछे मुड़कर देखा तो वो मेरे नितम्बों को देख रहे थे जौ कुछ ज्यादा ही बाहर निकले हैं और पेंटी ना होने के कारण नाईटी भी दरार मॆं फँस जाती हैं। इस बार वो भी मुस्कुरा दिये और बोले भाभीजी आप अब दे ही दो……। मैं दम बोली ” क्क्क्या दे दूँ।।? वो बोले फाइल जौ भाई साहब ने मंगवाई हैं। मैं वो फाइल लाने बेडरूम मॆं गयीं तो वो उठकर बाथरूम चले गये।

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मेने फाइल ला कर दी तभी मेरे पती का फोन आ गया और उसे जल्दी भेजने को बोला मेंने उन्हे बताया और वो निकल गये खैर मैं वापिस अपने लॅपटॉप पर कहानियाँ पढ़ने लगी। पर मन आज कहानी में नहीँ रंजित में लग रहा था। मैं लॅपटॉप छोड़ बाथरूम में गयीं तो अहसास हुआ वहाँ पड़े मेरे कपडों के साथ छेड़ -छाड़ हुई थी मेंने गौर किया मेरी पेंटी और ब्रा जौ मेंने रात को खोली थी गायब थी मैं समझ गयी अब मैं जल्दी ही बड़े लन्ड से चुदने वाली हूँ।
फ़िर में उसके सपने लेती सौ गयीं। उठी तो शाम हौ गयीं थी तब तक पती जी के आने का भी समय हौ गया था मैं नहा के फ्रेश हौ गयीं और एक बड़े गले का टोप और लोवर पहन लिआ। तभी घंटी बजी देखा तो पतिदेव और रंजित जी दोनो खड़े थे। मेरे तो मन में लड्डू फूटने लगे मेंने दोनो को अंदर बुला कर दरवाजा बँद किया। पती आगे फ़िर रंजित और आखिर में मैं हाल की तरफ़ चले तो मुझे देखकर उसने एक मस्त सी कामुक मुस्कान दी। मेंने भी उसकी आँखो मॆं मेरी नशीली आँखो से कामुक से इशारे मॆं पलकें झपका दी।

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वो दोनो सोफे पर बैठ गये। मेंने दोनो को पानी दिया और चाय बनाने चली गयीं। फ़िर मैं चाय देने के लिए झुकी तो नशीले अंदाज़ में बोले ” भाई साहब लीजिए ना।” मेरे बेचारे पती तो नहीँ समझे पर वो समझ गये बोले ज़रूर भाभीजी आपकी चाय का तो स्वाद दुनियाँ भुला दे। मैं समझ गयीं थी, मेंने अपनी चाय उठाई और उनके सामने वाले सोफे पर बैठ गयीं। तभी मेरे पतिदेव बोले कोमल आज रंजित यहीं रहेगा इसके परिवार वाले बाहर गये हैं और अब तो हम दोनो के मन मैं लड्डू फूटी।

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