कॉलेज टाइम के वो सुनहरे दिन

मलिक – साली कब से आवाज़े कर कर के तडपा रही थी, रंडी आज से तुझे हम सब चोदेन्गे और तू रंडी है इस रूम मे रहने वालो की..

और दोनो ने मुझे चोदना शुरू किया और मैं काफ़ी आवाज़े करने लगी.

मैं – आहह य्ाआआ छोड़ो ह्म याअ उफफफफ्फ़ हहााअ आअहह.

सलीम – आ गयी ना औकात पे आज तो तुझे पूरी रात ठोकेंगे हम सब.

तभी अफ़ज़ल आया और उसने अपना लंड मेरे मूह मे डाल दिया.

तीनो मेरे तीनो छेदो को चोद रहे थे और बाद मे बीच मे मुझे बिठाकर अपना पूरा माल मेरी बॉडी फेस बूब्स पे डाल के मुझे नहला दिया.

किसी ओरिजिनल रंडी की तरह लग रही थी. मैने आँख के आगे से माल हटाया और बाथरूम मे जाने लगी. तभी किसी दो ने मेरी गांड पे दोनो साइड जोरदार थप्पड़ मारा और मैं सिसकती हुई बाथरूम मे चली गई.

फ्रेश होके आई और चाय बनाई, पर अब रूल्स बदल गये थे. अब यहा हर एक मुझे चोद चुका था, तो अब सब न्यूड ही थे. नाश्ता करते करते भी मेरे बूब्स दबाते रहते थे.

ऐसा करीब 6 महीने तक हर सॅटर्डे फुल नाइट ये चलता रहा और वीक मे भी एक दो दिन दो घंटे जाती थी मैं जब फ्री होती थी, तब वाहा जो भी होता था वो चोदता था मुझे.

बाद मे उन सब की पढ़ाई ख़तम हो गयी तो वो चले गये, पर बाद मे भी तीन चार महीने मे एक बार तीनो आते थे स्पेशली मुझे चोदने के लिए.

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जैसे ही इन लोगो की एंट्री हुई मेरा बी.एफ से ब्रेक अप हो गया, क्योकि मुझे मज़ा नही आता था. और इन 6 महीने के दौरान मेरी एंगेज्मेंट भी हो गयी थी.

पर फिर भी ये खेल चलता रहा और कभी कभी मैं उन तीनो के साथ नंगी बेड पे होती हू और मेरे होने वाले पति का कॉल आ जाता, तो वो लोग मुझे बात करने को कहते और फिर मस्ती करते करते मेरे बूब्स दबाते या लंड चुसवाते.

वो पूछता क्या कर रही हू? तो मैं कहती थी बेड पर हू और वो वाहा सेक्स टॉक करता कॉल पे और मुजसे कहता मैं अंदर डॉल रहा हू महसूस करो.

तो यहा रियल मे कोई अंदर डालता और मैं ओरिजिनल आवाज़ निकालती उसे लगता, मैं यूही कॉल पे मज़े दे रही हू, पर मैं रियल मे मज़े ले रही होती हू.

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