छोटे भाई ने चोद चोद कर मुझे जन्नत का सुख दिया

फिर वो अपनी ऊँगली से मेरी चूत के होठ सहलाने लगा. मैं तड़प उठी. फिर महावीर अपनी ऊँगली से मेरी भगशिश्न को छूने और सहलाने लगा. मेरी चूत में भूचाल आ गया. महावीर जोर जोर से मेरी चूत घिसने लगा. जैसे सुबह सुबह औरते सिल पर मसाला घिस घिस कर पीसती है. ठीक उसी तरह महावीर मेरी चूत को अपनी ऊँगली से घिसने लगा और पिसने लगा.

“भाई !! अब मुझे जल्दी से चोदो!!..जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो और कूटना शुरू करो वरना मैं मर जाऊँगी!!” मैंने किसी शराबी की तरह कहा जो शाराब पीना चाहता हो पर उसे कहीं नही मिल रही हो.

महावीर ने अपना कच्छा उतार दिया. मैंने पहली बार अपने सगे भाई का लौड़ा देखा. मेरा भाई अब जवान हो चूका था. मुझे इस बात का गर्व था. महावीर का लौड़ा देखकर मैं बता सकती थी की मेरा भाई अब जवान हो चूका है. महावीर का लौड़ा अच्छा खासा कोई ७ ८ इंच का रहा होगा. अच्छा खासा मोटा भी था. उसने मेरे पैर खोल दिए. मेरी कमर और गांड के निचे एक मोटी तकिया लगा दी. इससे ये फायदा हुआ की मेरी चूत उपर उठ गयी. महावीर ने अपना लौड़ा मेरी चूत पर लैंड करवा दिया जैसे प्लेन हवाई पट्टी पर लैंड हो जाता है. मेरी चूत बिलकुल कुवारी थी. क्यूंकि मेरा कोई आशिक भी नही था जो मुझे चोदता और जन्नत के मजे देता. इसलिए मेरा भाई ही अब मेरा आशिक बन गया था. महावीर ने अपना लौड़ा हाथ में पकड़ लिया और मेरी चूत के दरवाजे पर रखकर अंदर धक्का मारने लगा. पर उसका लंड उपर की तरफ भाग जाता था. मेरी चूत में नही घुस पाता था. महावीर ने मेरी कमर एडजस्ट की. सीधा मेरी चूत के उपर आ गया और लंड हाथ से जड़ के पास पकड़कर उसने १ जोर का धक्का मारा. दोस्तों, मेरी माँ चुद गयी. क्यूंकि मेरी सील टूट चुकी थी. मुझे तेज दर्द होने लगा.

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महावीर ने मुझे कसके हाथ पैर से पकड़ लिया और चोदने लगा. मैं अब कुवारी कन्या नही रग गयी. मेरा छोटा भाई होनहार निकला. मुझे मजे से चोदता रहा. उसका लौड़ा मेरी चूत के खून से सन चूका था. मेरी कसी चूत की सीटी खुल चुकी थी. मैंने दर्द के बीच नीचे देखा. मेरा भाई मस्ती से झूमझूमकर मुझे चोद रहा था. मैं खुश थी की अब मैं भी अपनी सहेलियों को अपनी चुदाई के किस्से सुना सकूंगी. मैंने अपना फोन उठा लिया और महावीर से चुदवाते काई तस्वीरें ले ली. कुछ देर बाद महावीर ने मेरी उबलती चूत में अपना खौलता माल छोड़ दिया. अगेल दिन कॉलेज में मेरी मुलाकात मेरी सहेलियों से हुई.

“आई ऍम सॉरी मंजरी !!! यार मैं तू तेरे बारे में भूल ही गयी. तेरी सेटिंग मैं जरुर करवाउंगी !!” माधवी बोली.

“रहन दे !! बहन की लौड़ी !! मैंने अपने लिए लंड ढूढ लिया है!” मैंने कहा. मैं भाव खाते हुए अपना पर्स खोला. फोन निकाला और सबको चुदाई की गर्मा गर्म तस्वीरे दिखाई. सारी सहेलियों की माँ चुद गयी. सबके होश उड़ गये.

“ओ.. बहनचोद !! कौन है ये लड़का ???’ माधवी और बाकी सहेलियां पूछने लगी. सब की सब हैरान थी. सबकी आँखें फटी फटी हो गयी थी.

“..छोटा भाई है मेरा!! कल शाम को उसी का लंड मैंने खाया है!!” मैंने कहा

“ओह बहनचोद !! मंजरी ! तू तो बहन की लौड़ी बन गयी” माधवी बोली

“..हाँ !! और क्या करती. तुम सब की सब तो आपने आशिकों से चिपकी रहती हो. तुम लोगों के पास तो मेरे लिए टाइम नही है” मैंने कहा

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“..सही है बहन. बहन की लौड़ी बनकर तूने मस्त मजे लिए कल. सही है मंजरी !!! सही है री!!” सब की सब मेरी तारीफ़ करने लगी. मैंने सबको बताया की कैसे कैसे मेरे भाई महावीर ने मुझे चोदा. दोस्तों कुछ दिन बीते तो मेरा फिर से भाई से चुदवाने के मन था. संडे की सुबह को मेरे घर में सब ११ बजे तक सोते रहते है.. भाई से चुदवाने का ये अच्छा मौका था. मैं सुबह ५ बजे उठकर भाई महावीर के कमरे में चली गयी. वो गांडू नेकर उतार कर सो रहा था. मैं उसकी रजाई में घुस गयी और उसकी गोलियां और लौड़ा सहलाने लगी. दोस्तों लडकों का लंड तो सुबह सुबह वैसे ही खड़ा रहता है. जब मैं महावीर का लौड़ा सहलाने लगी तो वो कुछ सेकंड में ही खड़ा हो गया. महावीर अभी सो रहा था.

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