मामा की बेटी की हॉट चुदाई कहानी

हेलो दोस्तो मेरा नाम आयुष है मैं नागपुर का रहने वाला हू और ये मेरी पहले स्टोरी है जो की मेरी मामा की लड़की के साथ है जिसका नाम सुरभि है काफ़ी मस्त माल है एक दम गोरी करेंट्ली उसकी हाइट 5’5 है बूब्स 32सी एक दम माल एक बार किसी को मौका मिले तो चोद ही दे कोई ग़लती हो जाए तो सॉरी..

ये स्टोरी काफ़ी पहले टाइम की है अराउंड 2011 की तब मैं क्लास १२ में था तब मेरी उमर करीब १९ साल थी और मेरे मामा की लड़की की उमर १६. मेरे मामा के तीन भाई है सबके घर एक में जुड़े हुए है सब के पास अपनी गाड़ी है कोई फाइनान्षियल प्राब्लम नही है सब अच्छा काम करते है मामा का खुद का बिज़्नेस है मेरी मामा की 2 लड़किया और 1 लड़का है सबसे बड़ी लड़की का नाम सुरभि है और बाकी सब उससे छोटे है मामा का लड़का सबसे छोटा है.
ऐसा नही था की मैं हरामी नही था में बचपन से ही बहुत हरामी था ह्म दोनो छोटे पन से एक ग़मे खेलते थे जिसका नाम मैने छोटा भीम रखा था जिसमे में सुरभि के उसके उपर चाड़कर अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ता और फिर उसकी बारी आती फिर उसको भी यही करना पड़ता..
और फिर ह्म एक दूसरे को चूमते वो मेरे लंड और मैं उसकी चूत को चूमता मैं आज जब बचपन की बातें याद करता हू तो सोचता हू की कितना हरामीपन किया है अपने बचपन में शायद ही कोई इतना हरामी होगा अपने बचपन में.

जब भी ह्म हाइड अंड सीक खेलते तो ह्म दोनो एक पास छुपते और मैं उसके खूब चुम्मे लेता और खूब अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ता उसको दीवाल में सटा कर. छोटे पन में जब नानी के यहा जाता तो उसको अकेले रूम में ले जा कर खूब अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ता कई बार ह्मलोग डॅन्स करते तो मैं उसके खूब अपना लॅंड रगड़ता खड़े हो कर.
एक बार मेरी परिवार और हमारे खानदान वाले सब लोग हमरी मौसी के यहा फॅमिली फंक्षन पर मिले वाहा मैने सब बड़े लोगो के पैर छुए और सब से मिला तब मैने सुरभि को देखा वो काफ़ी बड़ी हो चुकी थी उसके बूब्स काफ़ी बड़े हो गये थे..

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और मैं तो था ही हरामी उल्टे ख़याल आने लगा जब वो अकेले छत पर मिली तो मैने उसको जाकर पीछे से बूब्स से पड़कर गले पर किस करने ही वाला था तो उसने मुझसे खुद को हटाया और बोला जो भी पहले हुए तब ह्म बहुत छोटे थे में तुम्हारी हरकत बुआ को बताने जा रही हू.

मैने उसका हाथ पकड़ कर रोका और कहा प्लीज़ अब ऐसा कुछ नही होगा और कहा मुझको माफ़ कर दो फिर वो वाहा से चली गई उसने किसी को कुछ नही कहा बॅट ह्म जीतने भी दिन रुके ह्मने एक दूसरे से बात नही की बाकी के दिन मैने अपने मौसी के लॅड्कीयो के साथ बिताए और फंक्षन ख्त्म होने पर बिना बात किए ह्म दोनो अपने अपने घर चले गये.

हम सब लोग मेरे मामा के घर लखीमपुर छुट्टियों में जाया करते है करीब 6 महीने के बाद छूटीयो में हम मामा के यहा गये तो मैं सोच रहा था की सुरभि से कैसे नज़र मिलौगा मामा के घर पहुच कर सब से मिला और पैर छुए बट सुरभि से बात नही की मैने सुरभि को देखा तो वो और माल हो गई थी और अपने चस्मे में तो और मस्त लगती उसकी गांड भी बहुत मस्त हो गई थी.

सबसे मिलने के बाद मैने सोचा सुरभि के रूम में जाकर सॉरी बोल देता हू मैं सुरभि के रूम गया तो वो अकेले अपने रूम में थी मैने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा और बुलाया सुरभि सॉरी यार अब भी गुस्सा हो वो मूडी और उसने मुझको हग किया. मस्त बूब्स हो गये थे उसके मेरे सीने में लगे फिर मन किया की वही काम उठा दू बट फिर गांड नही फदवाणी थी मैने भी उसको कस्के गले लगाया और गाल पर किस किया और कहा सुरभि ई आम सॉरी यर्र.
वो बोली कोई बात नही भैया अब वो सब बातें छोड़ो और ह्म एक दूसरे को अब भी हग किया हुआ था मैने फील किया अब वो ब्रा पहेंने लगी है तो मैने उसकी पीठ पर हाथ फिराया तो ब्रा स्ट्रॅप मेरे हाथ में फस गई तो वो बोली भैया क्या कर रहे हो तो मैने एक दूसरे को हटाया और बोला कुछ नही और ह्म दोनो ने एक दूरसरे को स्माइल पास करी और बाहर सब के पास आ गये.
ऐसे ही ह्मलोगो का दिन काट जाता फिर ह्म लोग डेस्कटॉप पर गता खेलते जिसके बहुत सारे कोड्स मुजको आते ह्म सब बारी बारी से खेलते क्युकि सब मुझसे छोटे थे तो सब लोग गेम के टाइम मुजको कोड डालने को कहते जब सुरभि के ग़मे के टाइम में साइड में खड़े होकर कोड डाल रहा था तो उसके बूब्स से मेरी हाथ टच हुआ.

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फिर मैं तो था ही हरामी अगले बार कोड डालने पर में चयेर के पीछे हो कर और उसके गले के पास से जाकर कोड डालने लगा और कीबोर्ड के बहाने उसके बूब्स को हल्के हल्के टच करता रहा और मैने गौर किया उसके निपल्स कड़े हो गये थे और मेरे हाथ में फील हो रहे थे.
अब रात हो गई थी मामा के दुकान से आने के बाद हम सब्ने खाना खाया और फिर सब लोगोने मामा के पास बैठ कर करीब 1 घंटे बैठ कर बातें की और फिर सुरभि अपने रूम में चली गई. मेरी मम्मी और बेहेन एक कमरे में चले गये मामा के बच्चे मामा मामी के साथ रूम में सो गये और मैं जाकर सुरभि के रूम में उसके साथ बैठ कर टीवी देखने लगा ए/सी चलने की वजे से थोड़ी देर में ठंड लगने लगी.
फिर ह्म कंबल में एक पास बैठे गये और टीवी देखने लगे फिर धीरे धीरे ह्म दोनो के लेग्स एक दूसरे को टच कर रहे थे फिर मैने हिम्मत कर के उसके लेग्स पर लेग्स चड़ा ली मैने सुरभि की तरफ देखा तो वो नॉर्मल लग रही थी और मेरे पैर रखने पर उसका कोई रीऐक्शन नही था फिर ह्म ऐसे ही रहे काफ़ी देर लेटे रहे और मैने उसके पैर के उपर धीमे धीमे अपना पैर छडाए जा रहा था.

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