मेरी चाची की सेक्सी गॅंड

Chachi ki sexy gand mari हेलो दोस्तो, मेरा नाम विजय है और मैं अपने चाचा-चाची और मम्मी- पापा के साथ बरोडा मे ही रहता हूँ. मेरी स्टडी भी वही से हो रही है. दोस्तो, ये कहानी तब की है जब मेरे चाचा भोपाल शिफ्ट हो गये थे यानी उनके ऑफीस की तरफ से भोपाल पोस्टिंग हो गई थी और चाची को भी उन्ही के साथ ही रहना था. प्यार भरा परिवार चुदाई स्टोरी

दोस्तो, मैने आपको अपने चाचा जी का नाम तो बताया ही नही, उनका नाम नीरज है और मेरी चाची का नाम पिंकी है और उनकी अभी नयी-नयी शादी हुई और मेरी चाची एक दम मस्त पटाका माल है.

चाचा जी एक गवर्नमेंट एंप्लायी है और उन्होने भोपाल जाने के लिए एक ट्रक भी बुक करलिया था. चाची ने मुझे भी साथ चलने को कहा ताकि वो कुछ दिन खुद को अकेला ना महसूस कर सके और उनके कहने पर मैने भी ना नही करी क्योकि तब मेरी कॉलेज की छुट्टिया पड़ रखी थी.

अब हमने चाचा-चाची के रहने का समान ट्रक मे चढ़वाया और खुद भी शाम के 6 बजे बरोडा से भोपाल के लिए चल पड़े. चाचा आगे ट्रक ड्राइवर के साथ बैठे थे और मैं और चाची पीछे बैठे थे. पीछे बहोत सारा समान भी था जिसके बीच मे चाची ने एक गद्दा बिछा रखा था और उस पर हम दोनो आराम से बैठ गये थे.

चाची और मैं खूब बातें मारते हुए जा रहे थे और ट्रक ड्राइवर ने भी गाने लगा रखे थे जिसकी वजह से बहोत अछा महॉल बन रखा था. चाचा आगे बैठे ड्राइवर से बाते मार रहा था और मैं और चाची पीछे बैठे बाते मार रहे थे. हम 6 बजे करीब बरोडा से निकल लिए थे और रास्ते मे एम.पि बॉर्डर पर हमने खाना भी खा लिया था.

अब अंधेरा भी पड़ना शुरू हो गया था और मैं चाची के चिकने बदन को निहारे जा रहा था. उनका चिकना बदन उछाल-उछाल कर मेरे सामने आ रहा था और ये देख कर मेरा लंड पागल हो रहा था. ट्रक टूटते-फूटते रस्तो मे से भी जा रहा था जिससे हम दोनो एक दूसरे से टकरा जाते थे.

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ऐसेही चलते-चलते एक बहोत ही बड़ा खड्डा आया जिसके चलते मैं चाची से टकरा गया और मेरे हाथ उनके बूब्स पर जा लगे जिससे मेरा लंड खड़ा हो कर पैंट मे ही डंडा बन गया. मैने अब चाची की तरफ देखा तो चाची मुझे ऐसे देख मुस्कुराने लग गई जिनकी मुस्कुराहट से मुझे इशारा मिल गया की चाची भी तैयार है.

इसलिए मैं अब छोटे से खड्डे पर भी चाची से टकरा जाता और उनके जिस्म को छू लेता उधर चाची भी टकरा कर जवाब देने लग गई. चाची ने चद्दर ले रखी थी की तभी एक बड़ा सा खड्डा आया और मैं चाची से जा टकराया और उनके बूब्स को हाथ मे पकड़ कर दबाने लग गया. चाची भी बिना कुछ कहे मज़े लेने लग गई और फिर मैने अपना हाथ नीचे लेजा कर उनके चुत्तर को हाथ मे पकड़ कर दबा डाला.

चाची के मूह से आआहह निकल गई और फिर उन्होने चद्दर को उपर करके मुझे इशारा दिया की करेंगे ज़रूर पर बाहर नही चद्दर के अंदर. मैने भी उनकी बात को समझा और उनकी गॅंड को अपने हाथो से छेड़ने लग गया.

फिर मैं चाची के बूब्स को हाथ मे लेकर दबाने लग गया और चाची भी लंबी लंबी सिसकारिया भरने लग गई. मुझे उनके छोटे-छोटे बूब्स दबाने मे बहोत मज़ा आ रहा था और चाची ने भी अब मेरे लंड को पैंट के उपर से पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसलने लग गई.

मुझे भी उनके ऐसे करने से खूब मज़ा आ रहा था और अब मैं उनकी कमीज़ को उतारकर अलग कर दिया और अपना हाथ नीचे लेजा कर नाडा खोल कर मैने सलवार नीचे कर दी और चाची भी मेरे लंड को हाथ मे लेकर ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया.

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अब चाची ने अपनी ब्रा को बिना खोले एक बूब बाहर निकाल दिया जिसे मैं अपने मूह मे लेकर चूसने लग गया और चाची भी लंबी लंबी सिसकारिया भरने लग गई. चाची अब अपनी चूत को उपर कर घोड़ी बन गई और उनकी इछा थी की अपनी चूत मरवाए पर मेरा मन तो उनकी गॅंड मारने का कर रहा था.

मैने अपना लंड बाहर निकाला और उनकी चिकनी गॅंड पर जीब लगाकर चाटने लग गया जिससे चाची मदहोश होती चली गई और फिर मैने चाची की गॅंड पर बहोत सारा थूक लगाया और उस पर अपना लंड सेट किया और जब मैने चाची की तरफ देखा तो चाची मुझे देख कर हसने लग गई.

अब चाची ने मुझे देख कर हसते हुए इशारा किया तो मैने भी लंड को उनकी गॅंड मे डालना शुरू कर दिया पर ट्रक के झटको की वजह से लंड अंदर नही जा पा रहा था की तभी चाची ने मेरे लंड पर अपनी थूक लगाई और लंड को अपनी गॅंड पर रख कर खुद लंड को अंदर लेने लग गई.

चाची की टाइट गॅंड मे जैसे ही लंड गया तो लंड उसकी गरमाहट से पागल हो गया और मैं भी धीरे-धीरे लंड को अंदर डाल कर गॅंड को मारने लग गया. मैं कुत्ते की तरह चाची के उपर चढ़ कर नीचे से उनके बूब्स पकड़ कर उनकी गॅंड चोद रहा था और चाची भी अपनी चूत पर अपना हाथ रखकर चूत को मसल रही थी और मूह से आआअहह आअहह आहह आअहह की आवाज़े निकाल रही थी.

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