भैया बना सैया

हमारे मोहल्ले के लड़के मुझे देखकर अपने लंड पर हाथ फेरने लगते हैं।

मैंने पहले अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स के खूब मज़े लिए है लेकिन फिर वो पढ़ाई करने के लिए बाहर चला गया और अब मैं यहाँ अकेली रह गई हूँ।

यह स्टोरी मेरी और मेरे भाई के बीच की है।
मेरा बड़ा भाई उम्र 21 साल है और वो 3rd ईयर का स्टूडेंट है, वो दिखने में एकदम मस्त है और अच्छी बॉडी है, उसकी हाईट 5’6″ है।

भाई से लड़ाई झगड़ा
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हम दोनों का कॉमन रूम है, हम आपस में बहुत लड़ाई करते रहते हैं और एक दूसरे को चिढ़ाते रहते हैं।
माँ भी हमें डांटती रहती है।

एक दिन में कॉलेज से लेट हो गई और जब घर आई तो भाई पूछने लगा कि कहाँ गई थी?
तो मैंने कहा कि सहेलियों के साथ थी।

वो लड़ने लगा तो मैं भी चिल्ला पड़ी तो उसने मुझ पर हमला सा कर दिया और मुझको पकड़कर नीचे गिरा दिया।

भाई का लंड

फिर मैंने भी उल्टा जवाब दिया और उसे गिरा दिया और उसके पेट के ऊपर बैठ गई, उस टाईम शायद उसका लंड खड़ा हो गया था और मेरी गांड की दरार में चुभने लगा था।

मैं समझ गई थी लेकिन मेरा हटने का मन नहीं कर रहा था और यह बात शायद भाई भी समझ गया था।
उसने मुझे धक्का दिया तो मैं नीचे गिर गई और वो मेरे ऊपर आ गया, मेरे पैर खुले होने की वजह से उसका लंड मुझे सीधा चूत पर महसूस होने लगा, तो मैं झट से उसे धकेलकर वहाँ से जाने लगी।

जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो भाई की पैंट में बहुत मोटा सा हिस्सा उभरा हुआ था, मैं सोच में पड़ गई कि भाई का लंड कितना बड़ा होगा?

उस दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपनी पेंटी उतारी तो मेरी चूत में से ढेर सारा पानी निकला।
मैं सोच में पड़ गई कि अपने सगे भाई को टच करते ही मुझे आज क्या हो गया है?

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और मुझे खुद पर शर्म भी आ रही थी और वो पल याद करके मज़ा भी आ रहा था।

मेरी चूत की चुदास

उस दिन मुझे बहुत खुजली हुई, लेकिन मैंने उस खुजली को अपनी चूत में उंगली से शांत कर लिया।

फिर मैंने सोच लिया कि मैं भाई को गर्म करके देखूँगी, अगर हो गया तो घर की बात घर में रहेगी और खुजली भी मिट जायेगी।

अब मैं भाई के सामने छोटे-छोटे कपड़े पहनने लगी और उसे अपने 36 साईज़ के बूब्स भी दिखाने लग गई।
वो भी मुझे गौर से देखता था लेकिन ऐसे बर्ताव करता था जैसे उसने कुछ ना देखा हो!

मैं अपनी मोटी गांड मटकाती थी और उसके सामने जानबूझ कर ऐसे चलती थी।

एक दिन माँ पापा एक हफ्ते के लिए छुट्टी मनाने शिमला चले गये और हम दोनों कॉलेज में टैस्ट की वजह से घर में ही रह गये।

यह मेरे लिए एक गोल्डन चान्स था, मैंने इसके लिए एक प्लान बनाया और उसी के मुताबिक रात को छत से आते वक्त मैं सीढ़ियों से फिसल गई और ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला कर रोने लगी।

पंकज दौड़ता हुआ आया और मुझे उठाकर पूछने लगा कि कही चोट तो नहीं लगी।
तो मैंने बताया कि घुटने और कमर में मोच आ गई है, तो वो डॉक्टर के पास जाने के लिए कहने लगा, लेकिन मैंने कहा कि ऐसे ही ठीक हो जायेगा।

उसने मुझे दर्द की गोली दी और मुझे लिटा दिया, लेकिन रात को 10 बजे मैंने भाई को बुलाया और उसे मालिश करने के लिए कहा तो उसने हाँ कर दिया और किचन में तेल लेने चला गया।

मैंने उस दिन सूट और खुली वाली सलवार पहन रखी थी।
मैंने कहा कि मेरे घुटने और कमर की मालिश कर दे!

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वो आकर मेरे पास बैठ गया, मैंने अपनी सलवार को घुटने के ऊपर तक उठा लिया और भाई मालिश करने लगा तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा।
फिर मैंने कहा- भाई, थोड़ा और ऊपर तक कर!
वो अपना हाथ मेरी जाँघ तक लाकर मालिश करने लगा।

मैंने जब तिरछी नज़रो से देखा तो वो मेरी गांड को घूर रहा था और उसके पजामे में बहुत मोटा टेंट बना हुआ था।
मेरी तो चूत टपकने लगी थी।

फिर मैं ऊपर कमर करके लेट गई और उसे कमर की मसाज करने के लिए कहा तो वो तुरंत बोल पड़ा कि उसके कपड़े गंदे हो जायेंगे। तो मैंने कहा कि भाई शर्ट पजामे को उतार दे और फिर मालिश कर!
तो उसने सुनते ही अपना पजामा हटा दिया और मेरे पास आ गया।

मैंने अपना शर्ट और ब्रा स्ट्रिप्स तक हटा लिया और उसे इशारा किया, वो तो जैसे इस पल के लिए तड़प रहा था, अपने हाथ में तेल लेकर मेरी कमर पर मलने लगा तो मेरे मुँह से आह्ह्ह निकल गई।

उसने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- आराम मिल रहा है, भाई ऐसे ही कर!

फिर वो अपना हाथ मेरी ब्रा तक लाने लगा और कहने लगा- शिखा तेरी ये अटक रही है!
मैं- क्या भाई?
पंकज- ये बनियान!

मैं- इसे बनियान नहीं कहते हैं।
पंकज- तो क्या कहते हैं?
मैं- भाई, इसे ब्रा कहते हैं।

पंकज- तो ये मालिश करने में अटक रही है।

फिर मैंने अपनी ब्रा का हुक खोल कर उसे हटा दिया और उसे लगातार मालिश करने का इशारा किया।

वो मेरे कूल्हों को टच करने लग गया और ऊपर मेरे बूब्स पर उंगलियां लगाने लगा।

मैं- भाई, थोड़ा बीच में कमर पर करो, आराम मिल रहा है।
पंकज- मुझसे ऐसे नहीं हो रहा, उसके लिए तेरी कमर के दोनों तरफ पैर रखने पड़ेंगे।

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