भाभी की लंड चूसने की खावहिश

मेरे सभी प्यारे दोस्तो का मेरी कहानी मे खुले दिल से स्वागत है. ये कहानी मेरी लाइफ के पहले सेक्स की कहानी है. जो मैने अपनी भाभी के साथ ही किया था. ये किस्सा सच मे मेरे लिए बहुत मस्त था. क्योकि मैने कभी सोचा भी नही था, की मैं अपनी ही भाभी को चोदुन्गा.
अब कहानी शुरू करते है.
मेरा नाम रवि है, और मैं पंजाब मे रहता हूँ. मेरे घर मे मैं और मेरे बड़े भाई और मम्मी पापा रहते है. भाई की शादी पटियाला की एक लड़की मंदीप कौर से हो गयी. अभी शादी को ज़्यादा टाइम ऩही हुआ था.

मेरी भाभी सच मे पटियाला की माल थी. वो सच मे काफ़ी सुंदर और सेक्सी थी. उसे जब मैने पहली बार देखा तो उसे मैं देखता ही रह गया. क्योकि इतनी सुंदर लड़किया देखने को मिलती कहा है आज कल.

मैं अपने भाई की किस्मत देख कर काफ़ी हैरान हुआ करता था. क्योकि मुझे समझ नही आ रहा था की काहा मेरा भाई चूतिया सा और ये परी कहा इसके चक्कर मे पड़ गयी. खैर जो अब हो गया सो हो गया, पर मैं इस लिए भी खुश था की वो परी मेरी भाभी है.

मैं भाभी के साथ सेक्स तो नही कर सकता था, पर कम से कम मस्ती तो कर ही सकता हूँ. मेरी उम्र उस टाइम 19 साल थी, मैं भी जवान हो रहा था. भाभी की उम्र 23 साल थी, वो एक दम जवान थी.

उनका रंग गोरा बूब्स करीब 34 के और कमर 28 की और गांद 38 की होगी. सच मे एक मस्त जवान पंजाबन हमारे घर मे आ गयी थी. मैं ये सोच सोच कर परेशान होता था की भाभी की जवानी को कैसे भला भाई संभालते होंगे.

क्योकि इतनी मस्त चीज़ आसानी से खुश नही होती होगी. फिर ऐसे ही टाइम निकलता चला गया, भाभी के साथ मेरी बनने लग गयी. हम दोनो अब बातें करने लग गये थे, धीरे धीरे हम दोनो थोडा मज़ाक मस्ती भी कर लेते थे.

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एक दिन मम्मी पापा को मेरे मामा की लड़की की शादी मे जाना पड़ गया. वो दोनो फ्री थे इसलिए 15 दिन पहले ही चले गये. हम सब को शादी वाले दिन ही आना था. अब हम तीनो ही घर पर अकेले थे, पर भाई को ऑफीस के काम से देल्ही जाना पड़ गया. वो भी अब 2 या 3 दिन घर नही आने वाले थे.

इसलिए अब घर पर मैं और भाभी ही अकेले रह गये थे. इसलिए मैने भाभी को कहा की आज आप घर पर कुछ मत बनाना हम दोनो आज बाहर घूमने चलते है. भाभी मेरी बात जल्दी से मान गयी. ये सुन कर मैं भी कुछ हो गया.

पहले हम इधर उधर घूमे फिर दोपहर को मैने उन्हे एक मूवी दिखा दी. मूवी बहुत ही रोमांटिक थी, जिसका असर भाभी पर सॉफ सॉफ दिख रहा था. मूवी ख़त्म होने के बाद हम दोनो बाहर आए और मैने भाभी को डिन्नर करने के लिए कहा. पर भाभी ने कहा की मै डिन्नर पॅक करवा लू, हम दोनो घर पर ही जाकर डिन्नर करेंगे.

ये बात मुझे उनकी अच्छी लगी, क्योकि वाहा भीड़ भी बहुत हो रही थी. फिर मैं डिन्नर पॅक करवा लाया और हम दोनो घर आ गये. घर आते ही भाभी ने कहा की पहले कपड़े चेंज करते है, फिर हम दोनो डिन्नर करते है. मैं तो जल्दी से कपड़े चेंज करके डाइनिंग टेबल पर आ गया.

थोड़ी ही देर मे भाभी नाइटी डाल कर आई. कसम से वो बहोत ही खूबसूरत लगरी थी. मैं तो उन्हे देखता ही रह गया, उन्होने पिंक कलर की ज़िप वाली नाइटी डाली हुई थी. वो बहुत ही टाइट नाइटी थी, जिसमे उनका पूरा जिस्म दिख रहा था.

उनके बूब्स ब्रा, पेंटी सब कुछ दिख रहा था. उन्हे इस रूप मे देख कर मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था, मेरा लंड अब खड़ा होने लग गया था. मैं जैसे तैसे अपना लंड भाभी की नज़रो से छुपा रखा था. तभी मैं भाभी की खूबसूरती को देख कर बोला.

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मैं – भाभी आज डिन्नर मैं डालूँगा, आप रोज हमे देती है आज मैं आपको दूँगा.

भाभी – ठीक है मेरे देवर जी जैसी आपकी मर्ज़ी.

फिर मैने पहले भाभी की प्लेट मे चावल डाले, और जब मैने दाल डालने लगा तो मुझे भाभी के गोरे बूब्स दिख गये. जिस वजह से मेरा ध्यान एक दम हट गया और मैने सारी दाल भाभी के बूब्स के उपर ही गिरा दी. दाल गिरते ही भाभी ज़ोर से चिल्लाई.

मैने सॉरी कहते हुए जल्दी से एक कपड़ा उठाया और उनके बूब्स पर रख कर उनके बूब्स को सॉफ करने लग गया. मैने बूब्स को सॉफ करते हुए धीरे धीरे मसलने लग गया. मैने देखा भाभी अब एक दम शांत हो गयी, उन्होने अपनी आँखें बंद कर ली है.

मैने धीरे धीरे उनके बूब्स अब ज़ोर ज़ोर से मसलने लग गया. मुझे बूब्स मसलने मे बहुत मज़ा आ रहा था. पर भाभी को देख कर ऐसा लग रा था, मानो उन्हे मुझसे ज़्यादा मज़ा अपने बूब्स मसलवाने मे आ रहा था.

उनके बूब्स एक दम कड़क हो गये थे, मैं समझ गया था की भाभी अब बहुत गरम हो गई है. मैने मोका देख कर उनकी नाइटी की ज़िप थोड़ी सी खोल दी, भाभी ने मुझे कुछ नही खा. अब मैं ब्रा के उपर से उनके बूब्स को मसल रहा था.

कसम से मैं इतने पास से कभी बूब्स नही देखे थे. फिर मैने नाइटी की पूरी ज़िप खोल दी. फिर मैने अपना हाथ उनके बूब्स से नीचे करते हुए उनके चिकने पेट पर ले आया. भाभी ने मुझे अभी कुछ नही कहा था, इसलिए मैं अपने काम मे लगा रहा.

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