बहोट बड़ा धोखा

हेलो मेरे प्यारे दोस्तो, मै सरला आज फिर आप के लिए अपनी एक दम ब्रांड न्यू कहानी ले कर आई हूँ. सब से पहले आप सब के खड़े लंड को मेरी प्यासी गुलाबी चूत का नमस्कार. मुझे आप के लंड का प्यार मेरी हर कहानी के नीचे मिल जाता है. जब आप मुझे कॉमेंट्स मे कहानी के बारे मे लिखते है. और साथ ही मुझे गंदी गंदी गालियाँ भी देते है.

मुझे आप सब के प्यार की बहोत ज़रूरत है. क्योकि आप के इसी प्यार की वजह से ही मैं अपनी नयी कहानिया लिख पाती हूँ. मुझे आप के मैल भी डेली मिलते है. जिसे पढ़ कर मेरा दिल खुश हो जाता है. क्योकि जो मज़े मैने रियलिटी मे लिए है. वो सब मैं जब वर्ड्स मे लिख कर एक कहानी के रूप मे आप के आगे पेश करती हूँ. तो बहोत मज़ा आता है. ये देख कर मैं और मेरा दिल बहोत खुश होता है.

जब मैने अपनी पिछले महीने की कहानी मे बड़े लंड की एक कहानी लिखी थी. तो आप मे से काफ़ी सारे दोस्तो ने मुझे मैल मे अपने खड़े लंड की फोटोस भेज दी. जिसे देख मेरी चूत पानी-पानी हो गई. मुझे विश्वास नही हो रहा था की मेरे सब दोस्तो के लंड 7 इंच से बड़े है. और कही लंड तो 10 इंच के भी है. वा क्या दम दार दोस्त है मेरे.

मैं ये ही सोचती हूँ की ये लंड जिस किसी भी चूत मे जाते होंगे. वो चूत कितनी लकी होगी. सच मे मुझे तो बहोत मज़ा आता है ये सब सोच कर. अगर मैं सच बताऊ तो मेरा दिल भी आप के लंड अपनी चूत मे लेने का करता है. पर मैं ऐसा नही कर सकती क्योकि मैं एक शादीशुदा औरत हूँ. और मेरे पति का लंड 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है.

जिस वजह से मुझे बाहर के लंड लेने की कभी ज़रूरत महसूस नही हुई. पर मैं ठहरी चुदक्कड़ औरत जिसे ऐसे काम करने की बहोत गंदी आदत रही है. मैं शादी से पहले ही अपने सारे पड़ोस और बहोत के लंड का स्वाद चक चुकी हूँ. पर मुझे शादी से पहले सिर्फ़ हमारे दूधवाले का लंड ही पसंद था.

More Sexy Stories  पहली बार चुदाई का एहसास

उस साले का क्या लंड था वो मेरी चूत मे दूध भर के मेरी चूत मारता था. जिससे कुछ ही देर मे मेरी चूत मे लस्सी बन जाती थी. और बाद मे मक्खनं और बाद मे वो उसे ही चाट-चाट कर ख़ाता था. शादी से पहले मैं सेक्स लाइफ को इतना एंजाय कर लिया था. मानो मैं सब की बीवी हूँ और जब जिसका मन करे वो मुझे चोद जाता था. घर मे एक मंदिर का घंटा बनी हुई थी. जब भी किसी का मुझे बजाने का दिल करता था. वो मुझे आ कर मेरी दोनो टाँगे उठा कर मुझे बजा देता था.

खैर आज मैं आज की कहानी पर आती हूँ. आज की कहानी मेरी नही है. हा दोस्तो मैं सच कह रही हूँ ये कहानी मेरी नही है. बल्कि मेरे पड़ोस मे रहेने वाली ऋतु की है. उसकी भी शादी हो रखी है और उसकी फैमिली और मेरी फैमिली की बहोत अच्छी बनती है. एक रात हम दोनो के पति कही बाहर पार्टी मे गये हुए थे.

तब मैं और वो दोनो छत पर घूम रहे थे. तब जा कर उसने मुझे अपनी ये कहानी बताई. जिसे सुन कर मुझे लगा की अगर इसकी कहानी सुन कर मेरी चूत गीली हो गई है. तो आप सब के लंड तो पागल हो उठेगें. इस लिए मैं उसी टाइम ये कहानी लिखने का फ़ैसला कर लिया था. तो चलिए अब आप सब अपने लंड को तैयार कीजिए और क्योकि अब मूठ मारने वाले है. मेरी आज की कहानी पढ़ने के बाद.

तो चलिए शुरू करते है.

पहले मैं अपनी दोस्त ऋतु के बारे मे बता दू. या ऐसी करती हूँ बीच मे मैं नही आती. आज आप को ये कहानी ऋतु ही सुनाएगी. हां ऐसा ठीक रहेगा तो ये कहानी ऋतु की ज़ुबानी.

More Sexy Stories  मा ने दिखाया स्वर्ग

हेलो दोस्तो मेरा नाम ऋतु है और मेरी उमर 23 साल है. और अगले 2 महीने बाद मैं 24 साल की हो जाऊंगी. मेरा रंग गोरा है और चेहरा काफ़ी सुंदर है. जोकि मुझे अपनी मा बाप से मिला है. मेरा फिगर 34-26-36 है. मैं देहरादून से निलोखड़ी +2 क्लास पास करने के बाद यहाँ आई थी. क्योकि मुझे शुरू से पढ़ने का बहोत शोक था.

इसलिए मैं यहा के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक मे अड्मिशन ले लिया था. जैसे ही मैने कंप्यूटर इंगिनेरिंग अच्छे मार्क्स मे पास करी तो कॉलेज वालो ने मुझे वही पर टीचर की जॉब ऑफर कर दी और मैं खुशी खुशी हाँ भी कर दी. शायद कॉलेज का स्टाफ मुझे जैसे सेक्सी लड़की को अपने कॉलेज से जाने नही देना चाहता था. क्योकि उन सब की नज़र हर वाक़त मेरे बूब्स और मेरे चुत्थाडो पर ही रहती थी.

ये सब मुझे अच्छा भी लगता था क्योकि एक लड़की को सारे घूर घूर कर देखे उसे और क्या चाहिए. मेरे क्लास के लड़के भी मुझे एक रात के लिए अपने साथ अपना हमबिस्तर बनाना चाहते थे. पर मुझे किसी लड़के और किसी और मे कोई इंटरेस्ट नही था. जब मैं कॉलेज मे टीचर बनी तो मैने अपने मम्मी पापा और दादा जी को बताया.

मेरी ये बात सुन कर वो बहोत खुश हुए. मैं कॉलेज से 10 दिन की छुट्टी ले कर अपने घर गई. तो मुझे पता चला की मेरे दादा जी हरिद्वार गये हुए है. जब मेरी छुट्टी को 4 दिन रह गये थे तब वो अपने साथ एक लड़के को ले कर आए. मैं अपने दादा की बहोत इज़्ज़त करती हूँ और उनकी हर बात को बिना कुछ कहे मान जाती हूँ.

Pages: 1 2 3 4