मेरा आंटी को चोदना का सपना

हेल्लो दोस्तो, कैसे हो आप सब! मेरा नाम जस्स है और मेरी उमर 25 साल है. मैं अहमदाबाद मे रहता हूँ और उसी शहर मे एक कंपनी मे जॉब करता हूँ. मैं दिखने मे काफ़ी हॅंडसम हूँ और काफ़ी लड़किया भी मुझ पर मारती है. पर सच कहु तो मुझे आंटीया और भाभीया बहुत ही ज़्यादा पसंद है.

मुझे इन्हे चोदने मे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आता है. वैसे भी आए क्यो ना क्योकि इन्हे सेक्स का काफ़ी एक्सपीरियेन्स होता है इसलिए मैं इन्हे चोद कर ज़्यादा खुश रहता हूँ. मुझे औरतो का मुह ओर गॅंड मरने मे काफ़ी मज़ा आता है. मुझे आंटीया को चोदने मे बहुत ही मज़ा आता है. क्योकि ज़्यादातर आंटीया सेक्स की बुखी होती है.

और मैने 8 इंच लंबे लंड से उन सब की प्यास बहुत अच्छे से बुझा देता हूँ. मैने अब तक 4 स्कूल टीचर्स को खूब अच्छे से चोददा है. और जिस कंपनी मे मैं काम करता हूँ. वाहा पर मैने अपने एक दोस्त की वाइफ को भी चोद दिया है. मुझे किसी चूत की प्यास बुझाना बहुत अच्छा लगता है.
दोस्तो, ये सब तो मैने अपने बारे मे थोड़ा बता दिया है पर अब मैं आपको अपनी स्टोरी पर ले चलता हूँ. मुझे उमीद है की आप को मेरी आज की कहानी पसंद आएगी.

ये बात आज से एक साल पहले की है जब मैं एक नगर मे रेंट पर रहता था. मेरे साथ 3 ओर दोस्त थे जो की मेरे फ़्लैट से थोड़ी सी दूरी पर रहते थे और वो किसी दूसरी कंपनी मे लग हुए थे. मैं जिस फ़्लैट मे उपर वाले पोर्षन मे रहता था ठीक उसी के नीचे एक अंकल- आंटी रहते थे. वो आंटी को जब मैने देखा था तो मैं तो उन पर फिदा सा ही हो गया था. क्योकि वो दिखने मे बहोट ही सुंदर थी और फिगर तो एक दम मस्त फटाका था.
उन आंटी का नाम सुनीता था और उनका फिगर 36-34-36 का था जिसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था. वो दिखने मे काफ़ी जवान लगती थी. मैं उन्हे ऐसे ही डेली देखता था और वो भी मुझे डेली देखती थी. मैने उसे देखते ही चोदने के सपने देखने लग जाता था. सच मे वो आंटी मुझे बहोट ही पसंद आ गई थी.

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मैं अब घर आ कर उसके नाम की मूठ मरता और यही सोचता था की कब इसे चोदने का मोका ना जाने मुझे कब मिलेगा. मैं डेली सुबह 9 बजे घर से ऑफीस के लिए निकलता था और ऑफीस जा कर भी उन्ही के बारे मे सोचता रहता था. सुबह सुबह सुनीता आंटी के दर्शन से मेरा दिन बहोट अच्छा निकलता था.
अब हाल ये था की मैं रोज सुबह उनके दर्शन करके ही घर से निकलता था. और आंटी भी मुझे डेली 9 बजे अपने घर से बाहर ही मिलती थी. मुझे लगता था की शायद आंटी भी मेरा ही वेट करती है.

ऐसे ही कुछ टाइम बीत गया और मैं फिर डेली उनके नाम की मूठ मरने लग गया. फिर एक दिन मैं जब ऑफीस जा रा था तो मैने देखा की वो आंटी बाहर बैठी है और मुझे देख रही है. मैं भी उन्हे देख कर खुश हुआ क्योकि मैं भी उन्हे देखना चाहता था.

फिर ऐसे ही 10- 12 दिन निकलते चले गये. मैं उन्हे डेली ऐसे ही देखता और वो भी मुझे ऐसे ही डेली देखती रहती. फिर एक दिन जब मैं ऑफीस जा रहा था तो उन्होने मुझे देख कर स्माइल पास करी.
जो की मेरे लिए काफ़ी खुशी की बात थी. उनकी एक स्माइल से मुझे मानो ऐसे लगा की मैने आंटी को हासिल कर लिया. मैं ऑफीस मे बहोट खुश रहने लग गया और घर आ कर भी ऐसे ही खुश रहने लग गया.
ऐसे ही अगले दिन भी आंटी ने स्माइल दी तो मैने भी दे दी और मुझे रुकने के लिए कहा. तब मैं उनके पास गया और पूछा की क्या हुआ आंटी. तो वो बोली की कभी हमारे घर भी चाय के लिए आयो. वैसे मेरे पति भी एक प्राइवेट कंपनी मे लगे हुए है. वो सुबह 7 बजे निकल जाते है और रात को 10-11 बजे तक घर आते है.

ये सुन कर मैं काफ़ी खुश हुआ और उन्हे उस शाम का पक्का कह कर ऑफीस के लिए चल दिया. मैं आंटी की सारी बात अच्छे से समज गया था. दरअसल आंटी काफ़ी ज़्यादा परेशन थी अपने पति से. क्योकि वो सुबह जल्दी निकल जाता था और रात को घर लेट आता था. काम की वजह से वो काफ़ी थक जाता होगा.
इसलिए वो आंटी से ज़्यादा सेक्स नही कर पता होगा. इसलिए रोज रात को वो दोनो लड़ते थे. जो मुझे सॉफ उपर सुनाई आता था. मैं ऑफीस से घर आया तो जल्दी से नहा लिया और खूब अच्छे से तैयार हो कर आंटी के घर चला गया. आंटी ने मेरा काफ़ी अच्छे से वेलकम किया. और मुझे सोफे पर बिठा कर मेरे लिए चाय बना कर ले आई.
मैने आंटी से बातें करना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद मैने आंटी ने कहा की मैं एक सवाल पूछूँ अगर आप बुरा ना माने. आंटी ने कहा हन पूछो क्या पूछना है. फिर मैने कहा की आप दोनो रोज रात को इतना क्यो लड़ते हो क्या आप को कोई परेशानी है.

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मेरी ये बात सुनते ही आंटी मुझसे लिपट गई और बोली मैं क्या बताउ अब मेरे पति मुझसे ज़रा सा भी सेक्स नही करते. मैं काफ़ी टाइम से सेक्स की प्यासी हूँ. मुझे पूरी उमीद है इसमे तुम मेरी पूरी मदद करोगे. मैने जब तुम्हे पहली बार देखा था तभी मुझे लगा था की शायद तुम ही हो वो जो मेरी हेल्प करोगे.
मैने उनके होंठो को चूमा और कहा हन मैं आप की पूरी हेल्प करूँगा. ये कहते ही मैने उनके होंठो को चूसना शुरू कर दिया. और साथ ही उनके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया. ये सब हमने करीब 15 मिनिट ही किया. फिर आंटी ने मुझे कहा की मैं कल 12 बजे आउ ताकि आस पास के सब लोग अपने अपने काम के लिए निकल जाएँ.
फिर मैं अपने घर आ गया और मैने कल की अपने ऑफीस की छुट्टी ले ली. फिर मैं पूरी रात नही सो पाया क्योकि मैं ये ही सोच रा था की मैं कैसे कल आंटी को चोद दूँगा. उस रात मैने सोने से पहले आंटी के नाम की 3 बार मूठ मारी तब तक मुझे नींद नही आई.

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