भाभी की चुदाई के लिए वक्त नहीं था भाई के पास

भाभी की चुदाई के लिए वक्त नहीं था भाई के पास

(Bhabhi Ki Chudai Ke liye waqt Nahi Tha Bhai Ke Paas)

Bhabhi Ki Chudai Ke liye Vaqt Nahi Tha Bhai Ke Paasदोस्तो, मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। पहले मैं अपनी कहानी भेजने से हिचकिचाता था पर जब आप लोगों की कहानी पढ़ी तो मैंने भी अपनी भाभी की चुदाई की कहानी भेजने का मन बनाया।

मैं विशाल 22 साल का पतला सा लड़का हूँ, मैं बड़ौदा गुजरात का रहने वाला हूँ। यूँ तो मैं पतला हूँ पर मुझमें स्टेमिना कुछ ज्यादा है। मुझे पहले से ही शादीशुदा औरतों को चोदने का बडा शौक है और मेरी यह कहानी भी ऐसी ही है।

यह तब की बात है जब मैं बारहवीं की परीक्षा दे चुका था। तब मैं छुट्टी के समय घर बैठे बैठे परेशान हो गया था तो मैंने सोचा मैं कहीं घूमने चले जाता हूँ।
यह बात मैंने जब घर पर बताई तो पापा ने हाँ कर दिया और मैं मुंबई घूमने निकल गया। मुंबई में मेरे दूर के भैया भाभी रहते थे, मैं उन्हीं के घर ठहरने वाला था।

मुंबई सेंट्रल स्टेशन पहुंचने के बाद मैंने भैया को काल किया तो वह मुझे लेने आ गये। उनका घर भायंदर इलाके में था।
घर पहुँचे तो दरवाजा खटखटाने पर जब भाभीजी ने दरवाजा खोला तो मैं उन्हें देखता ही रह गया। भाभी बला की खूबसूरत थी।

अब मैं भाभी के बारे में बताता हूँ। भाभीजी की उम्र 32 की थी लेकिन वह 25 की लग रही थी। उनका फिगर 34 26 32 का था और देखने में वो सांवले रंग की थी।

भैया का स्टील का बिजनेस था तो वह दिन भर बाहर रहते थे और भाभीजी को ज्यादा वक्त नहीं दे पाते थे।
भाभीजी दिन भर घर रहकर बोर हो जाती थी इसलिए जब उन्होंने मुझे देखा तो वह खुश हो गई और भैया ने भी कहा कि अब तुम आ गए हो तो तुम्हारी भाभी को कंपनी रहेगी कुछ दिनों तक!

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भाभी जी मेरे आने से खुश तो थी मगर वह अंदर ही अंदर किसी बात को लेकर उदास भी थी।
तो मैंने उन्हें खुश करने का मन बना लिया क्योंकि मैं किसी औरत को उदास नहीं देख सकता।
मैं भाभी के साथ वक्त गुजारने लगा।

मैं- भाभी जी, लगता है आपको मेरा यहां आना पसंद नहीं आया?
भाभीजी- नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है।
मैं- तो आप मुझसे इतना दूर क्यों रहती हैं और कुछ बात भी नहीं करती?
भाभीजी- अब मुझे अकेले रहने की आदत हो गई है लेकिन तुम कहते हो तो हम काम खत्म होने पर मुंबई घूमने चलते हैं।

उनकी इस बात पर मैंने भी खुशी से हां कर दी। बाद में काम खत्म होने पर हम मुंबई घूमने चले गए। फिर मैंने मूवी देखने के लिए भाभी जी को बोला तो हम एक मल्टीप्लेक्स में मूवी देखने बैठे।

मूवी में एक सेक्स सीन आया तो भाभी जी शरमा गई, इस पर मैंने पूछा- भाभी जी, शरमा क्यों रही हो? आप तो ये सब अच्छे से जानती होंगी।
भाभी- चल बदमाश, जल्दी बड़ा हो गया तू तो?
और हम हंसने लगे।
मूवी खत्म होने पर हम घर आ गए।

हम बहुत थक गए थे तो भाभीजी ने चाय बनाई और हम दोनों चाय पीते हुए बात करने लगे।
मैं- भाभी, आप मूवी के वो सीन में शरमा क्यों गई थी?
भाभी- ऐसे वक्त तो शर्म ही आएगी ना!

मैं- अच्छा करते वक्त नहीं आती और देखते वक्त आती है?
भाभी- बड़ा बदमाश हो गया है तू, तुझे कब शर्म आती है?
मैं- मुझे शर्म तो आती नहीं पर आपको देख कर प्यार जरूर आता है।

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भाभी- अच्छा! मुझमें ऐसा क्या है जो तुझे प्यार आता है मुझ पे?
मैं- भाभी जी, आप हैं ही इतनी खूबसूरत कि बस आप ही को देखने का मन करता है।
और मैंने उनके करीब जाकर उनका हाथ अपने हाथ में ले लिया।

इस पर वह घबराकर शरमा गई तो मैंने उनको अपने पास खींच कर मेरे होठों को उनके होठों से लगा दिया।
वह मुझसे छूट कर किचन में चली गई, मैं भी उनके पीछे पीछे गया और किचन में जाकर उनको दीवार से लगा कर किस करने लगा।

पहले तो वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी लेकिन बाद में गर्म होकर वह भी मेरा साथ देने लगी।
भाभीजी- बिस्तर पर चलते हैं।

मैंने उन्हें किस करते हुए बिस्तर पर लेटा दिया और उनकी साड़ी ब्लाउज को निकाल दिया, अब वो सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी।
मैं अपनी शर्ट और पैन्ट निकाल कर उनके ऊपर आ गया।

अब मैं भाभी के बूब्स मसलते हुए उन्हें किस करने लगा, फिर नीचे खिसकते हुए मैंने उनकी ब्रा भी निकाल दी और उनके निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा।

धीरे धीरे मैंने उनकी नाभि को किस करते हुए पेटीकोट ऊपर कर उनकी पेंटी भी निकाल दी और उनकी चूत पर हल्का सा किस किया जिस पर वो आह भर के रह गई।
मैं उनको सारे बदन को जी भर कर चूम रहा था।

भाभी- अब डाल भी दो, और कितना तड़पाओगे?
मैंने अपना लंड निकालकर आधा लंड भाभी की चूत में डाल दिया तो भाभी ने तड़प कर मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया।

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